Breaking News

स्थायी लोक अदालत को लेकर पीएलवी और अधिकार मित्रों का प्रशिक्षण, आमजन को मिलेगा सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय सुबह-सुबह भीषण सड़क हादसा, तेज रफ्तार वाहन ने बाइक सवार को कुचला; मौके पर तोड़ा दम जनता की शिकायतों पर सीएम धामी का सख्त रुख, बोले- समस्याओं के समाधान में देरी बर्दाश्त नहीं; अफसर संवेदनशीलता से करें कार्रवाई श्रमिक हितों को लेकर भारतीय मजदूर संघ का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम 11 सूत्री ज्ञापन सौंपकर उठाईं लंबित मांगें काशीपुर में कार के अंदर मिला 26 वर्षीय टेंट कारोबारी का शव, माथे-गर्दन पर चोट के निशान; परिजनों ने जताई हत्या की आशंका आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर महिलाओं की नई उड़ान, 30 महिलाओं ने सीखा सौर उपकरणों का उत्पादन, मरम्मत और रखरखाव

जीएसटी विभाग पर गंभीर सवाल — 10 दिन से दी जा रही सूचनाओं पर नहीं हुई कोई कार्रवाई…

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

ख़बर शेयर करें -

शिकायतकर्ता बोले — “पूरे जिले में डिप्टी कमिश्नर की मर्ज़ी के बिना परिंदा पर नहीं मार सकता, फिर खामोशी क्यों?”

उधम सिंह नगर। जनपद उधम सिंह नगर के जीएसटी विभाग पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। एक शिकायतकर्ता के अनुसार, पिछले 10 दिनों से लगातार प्रतिदिन विभाग को फर्जी बिलिंग, कर चोरी और संदिग्ध गाड़ियों से जुड़ी सूचनाएं भेजी गईं। इन सभी सूचनाओं के स्क्रीनशॉट अख़बार के पास सुरक्षित हैं, फिर भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने हर दिन अलग-अलग गाड़ियों के नंबर भेजे, जो कथित तौर पर ट्रांजिट के दौरान टैक्स चोरी में संलिप्त थीं। इसके बावजूद, जीएसटी विभाग ने इनमें से एक भी गाड़ी को नहीं रोका।

आश्चर्य की बात यह है कि शिकायत में जिन गाड़ियों की सूचना दी गई थी, वही गाड़ियां बाद में उन्हीं गोदामों पर जाकर उतरीं, जिनका विवरण पहले से शिकायत में दर्ज था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इन गाड़ियों के गोदाम तक पहुँचने, माल उतारने और विभाग की निष्क्रियता का पूरा वीडियो और फोटो प्रमाण उनके पास सुरक्षित हैं, जिन्हें आवश्यक होने पर सार्वजनिक किया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि मामले की जानकारी डिप्टी कमिश्नर (एसआईबी/प्रवर्तन) उधम सिंह नगर तक भी पहुंचाई गई, क्योंकि जिले में यह माना जाता है कि उनकी मर्ज़ी के बिना कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जा सकता। फिर भी, अब तक किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं होना विभागीय मिलीभगत के संदेह को और गहरा कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक या दो गाड़ियों का नहीं, बल्कि संगठित तरीके से की जा रही कर चोरी से जुड़ा है, जिसमें विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी कहा कि अगर शिकायतकर्ता के पास सबूत मौजूद हैं, तो विभाग को तत्काल जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेंगे, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

और पढ़ें

error: Content is protected !!