सितारगंज – पूर्व विधायक नारायण पाल ने निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती मनमानी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों द्वारा उन्हें शिकायती पत्र सौंपे गए हैं, जिनमें विद्यालयों पर छात्रों को एक ही स्थान से किताबें, ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने के आरोप लगाए गए हैं।
पूर्व विधायक ने कहा कि कई विद्यालयों द्वारा अलग-अलग दुकानों को चिन्हित कर अभिभावकों पर वहीं से सामान खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने किसी विद्यालय का नाम लेने से इनकार करते हुए कहा कि सभी लोग पुराने परिचित हैं और वह व्यक्तिगत स्तर पर उनसे बात करेंगे।


नारायण पाल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में स्थानीय विद्यालयों ने बेहतर प्रदर्शन भी किया है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायक रहते हुए उन्होंने सितारगंज क्षेत्र में कई सरकारी विद्यालयों की स्वीकृति दिलाकर उनका निर्माण कराया था, ताकि आम लोगों को बेहतर और सस्ती शिक्षा मिल सके।
उन्होंने बार-बार बदलते सिलेबस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर वर्ष पाठ्यक्रम बदलने से अभिभावकों का बजट प्रभावित होता है। साथ ही उन्होंने बाजार में एनसीईआरटी की नकली किताबों की बिक्री पर भी चिंता व्यक्त की।
पूर्व विधायक ने कहा कि हाल ही में रुद्रपुर में करोड़ों रुपये की नकली एनसीईआरटी किताबें पकड़ी गई थीं, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर गंभीरता से मंथन और ठोस नीति बनाने की मांग की।

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