रुद्रपुर। माननीय आयुक्त कर महोदया के निर्देशन, अपर आयुक्त के मार्गदर्शन एवं संयुक्त आयुक्त (वि.अनु.शा./प्र.) के नेतृत्व में वर्ष 2026-27 के निर्धारित राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति तथा कर अपवंचन पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से विशेष अनुसंधान इकाई, रुद्रपुर द्वारा गुरुवार को सिडकुल स्थित एक पॉलिस्टर यार्न निर्माण इकाई पर व्यापक जांच, सर्वेक्षण एवं अभिग्रहण की कार्रवाई की गई।
जांच से पूर्व विभागीय टीम द्वारा संबंधित फर्म की व्यापारिक गतिविधियों एवं कार्यप्रणाली की गहन निगरानी की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फर्म ने वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश की विभिन्न फर्मों से माल अथवा सेवाओं की अंतः आपूर्ति दर्शाते हुए विनिर्मित माल की आपूर्ति की थी। हालांकि जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि फर्म द्वारा अपनी देय कर देनदारी का भुगतान कथित विवादास्पद आपूर्तिकर्ताओं द्वारा जारी बीजकों के माध्यम से किया जा रहा था।


जांच दल ने व्यापार स्थल एवं निर्माण इकाई में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर दस्तावेजों से उसका मिलान किया। साथ ही विवादास्पद आपूर्तिकर्ताओं के संबंध में फर्म संचालकों से विस्तृत पूछताछ भी की गई। सर्वे के दौरान व्यापार स्थल पर उपलब्ध अभिलेखों एवं लेखा दस्तावेजों को अग्रेतर जांच हेतु कब्जे में लिया गया है।
प्रारंभिक जांच में एक फर्म द्वारा विगत वर्षों में लगभग 3.50 करोड़ रुपये की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा किए जाने के संकेत प्राप्त हुए हैं। विभागीय टीम देर शाम 7:10 बजे तक कार्रवाई में जुटी रही तथा कर अपवंचन की वास्तविक गणना की प्रक्रिया जारी थी।
जांच टीम में विनय ओझा एवं जीशान मलिक सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

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