नई दिल्ली– (एम.सलीम खान) नई दिल्ली में देश की सर्वोच्च अदालत ने भारतीय नागरिकों की निगरानी के लिए इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के कथित प्रयोग के मामले में बुधवार को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने कहा है कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, होते हुए दिखना भी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश एस वी रमन्ना, न्यायाधीश सूर्य कांत और हिमा कोहली की पीठ ने इस तीन सदस्यीय समिति की अगुवाई शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन करेंगे। समिति बचाव को लेकर यह सुझाव भी देंगी कि तकनीक के इस युग में लोगों की निजता को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। अदालत ने मीडिया की आज़ादी से संबंधित बिन्दुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि वह सच का पता लगाने और आरोपी की तह तक जाने के लिए मामले को लेने के लिए बाध्य हैं।पीठ ने अंग्रेजी उपन्यास कार आरवेल के हवाले से कहा कि यदि आप कोई बात गुप्त रखना चाहते हैं तो आपको उसे स्वयं से भी छिपाना चाहिए।
पेगासस क्या है:


पेगासस एक जासूसी साफ्टवेयर का नाम है। जासूसी साफ्टवेयर होने की वजह से इसे साफ्टवेयर भी कहा जाता है। इसे इजराइली स्पाइवेयर कंपनी एन एस ओ ग्रुप ने तैयार किया है। इसके माध्यम से ग्लोबली पचास हजार से ज्यादा फोन को टारगेट किया जा चुका है। इसमें तीन सौ भारतीय भी है। यह एक ऐसा जासूसी साफ्टवेयर है जो टारगेट के फोन में जाकर डेटा लेकर इसे सेंटर तक पहुंचाता है | इससे एंड्रायड और आई ओ एस दोनों को टारगेट किया जा सकता है। इस साफ्टवेयर के फोन में इंस्टाल होते ही, फोन सर्विलांस डिवाइस के तौर पर काम करने लगता है। इजराइली कंपनी के मुताबिक इसे क्रिमिनल और टेररिस्ट को ट्रैक करने के लिए बनाया गया है।

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