काशीपुर– (सुनील शर्मा) काशीपुर रोडवेज बस स्टैंड के रामनगर रोडवेज बस स्टैंड में विलय होने के शासनादेश पर सियासत ने जोर पकड़ लिया है । इस मुद्दे पर विपक्ष जमकर धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध जता रहा है तो वही बीजेपी के विधायक हरभजन सिंह चीमा में भी रोडवेज के मुद्दे को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आपको बता दें कि वर्षों से स्थापित काशीपुर रोडवेज को रामनगर रोडवेज में विलय किए जाने के शासनादेश पर जहां जनता का कड़ा विरोध देखने को मिल रहा है तो वहीं स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर मोर्चा खोला हुआ है, काशीपुर से भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा के मैदान में कूदने से जहां इस मुद्दे की सियासत गरमा गई है तो दूसरी ओर बीजेपी विधायक द्वारा अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं , बीजेपी विधायक चीमा का विरोध जहां इस मुद्दे को और हवा दे सकता है तो वहीं 2022 के चुनावी बेला में पार्टी के लिए काशीपुर में मुश्किलें पैदा कर सकता है। गौरतलब रहें कि उत्तराखंड के वूजुद में आने के बाद सन् 2002 में निवर्तमान मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा भी काशीपुर रोडवेज बस स्टैंड को रामनगर में मिलाने की कवायद शुरू की गई थी लेकिन जनता की नाराजगी पर एनडी तिवारी द्वारा कवायद को वापस कर यथास्थिति को कायम रखा था, लेकिन इसबार वर्तमान भाजपा सरकार ने इस मुद्दे पर अपना आदेश जारी कर काशीपुर में सियासत को गरमा दिया है,जिसको कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मुद्दा बनाए हुए है तो दूसरी ओर सत्ताधारी बीजेपी विधायक हरभजन सिंह चीमा ने भी इस मामले में अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि सरकार काशीपुर को कुछ दे नहीं सकती तो उसे लेना भी नहीं चाहिए

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