नैनीताल-कुमाऊं विश्वविधालय निदेशक शोध प्रो ललित तिवारी ने चमन लाल महाविद्यालय लंढौरा हरिद्वार द्वारा आयोजित आधुनिक विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली का पुनरीक्षण कार्यशाला में औषधीय पौधो के उपयोगिता तथा भूमिका पर व्याख्यान दिया । प्रीफ तिवारी ने कहा की अश्विनी कुमार और ऋषि च्यवन ने अष्टवर्ग पौधे खोज जीवन को एक नई पहचान दी है तो संजीवनी की महत्ता से आप परिचित भी है ।आज कोविद काल और उसके बाद पौधो का महत्व फिर बढ़ गया है ।
इसलिए इनके संरक्षण के साथ प्रकृति को सतत विकास में ले जाना होगा जिससे इनका फायदा अनवरत चलता रहे। वर्तमान मे हमने तुलसी,नीम,भृंगराज,अदरक,आमला,ब्राह्मी,लेवेंडर,लौंग,इलायची,कालीमिर्च,हल्दी,पान,ईसबगोल,सर्पगंधा,बेल्लाडोना,सिंकोना,सफेद मूसली ,अश्वगंधा,गृतकुमारी,को घरेलू पौधो में शामिल कर लिया है। जंगलों से औषधीय पौधो की पूर्ति को कम करना तथा उनकी खेती पर जोर देना होगा जिसमें ईसबगोल,सोनपत्ति,एलोवेरा,लेवेंडर सतुआवा,लगली ,जैसे पौधो को उगाना होगा।


उत्तराखंड में औषधीय पौधो की अपार संभावना है तथा औषधि पौधो का विश्व कारोबार 5ट्रिलियन डॉलर का 2050तक हो सकता है तथा 10 मिलियन को कारोबार भी मिल सकता है । कार्यशाला में प्रो तिवारी ने ऑनलाइन व्याख्यान दिया।

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