हल्द्वानी- हल्द्वानी के पीपल पोखरा गांव की निवासी गंगा देवी की बाघ के हमले में मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। गांव में पसरे सन्नाटे और भय के बीच महिलाओं ने जंगल जाना लगभग बंद कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन करने वालों के लिए जंगल से घास-चारा लाना मजबूरी है, लेकिन अब हर कदम जान जोखिम में डालकर उठाना पड़ रहा है।
मृतका के पति प्रेम भारती ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन देखना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार सस्ता या अनुदानित चारा-भूसा उपलब्ध कराए तो महिलाओं को जंगल जाने की मजबूरी खत्म हो सकती है। स्थानीय निवासी विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि बाजार में चारा-भूसा महंगा होने के कारण पशुपालक जंगल जाने को मजबूर हैं। वहीं गीता पांडे ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए प्रभावी समाधान की मांग की। कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप भी लगाया और कहा कि शिकायत के बावजूद अधिकारी समय पर फोन नहीं उठाते।


वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए फतेहपुर रेंज के जंगल में दो पिंजरे लगाए हैं और आसपास के क्षेत्र में 12 ट्रैप कैमरे स्थापित किए गए हैं। विभाग की दो टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और ट्रेंकुलाइज करने वाली टीम भी अलर्ट पर है। डीएफओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने लोगों से जंगल न जाने और बाघ या तेंदुए की सूचना तुरंत देने की अपील की है। शासन की ओर से निर्धारित 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि मृतका के पति के खाते में जमा करा दी गई है। शुक्रवार को गमगीन माहौल में गंगा देवी की अंतिम यात्रा निकाली गई और गांधी आश्रम के पास जंगल क्षेत्र में उन्हें समाधि दी गई, जिसमें जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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