चमोली। (भरत सिंह गड़िया) देवाल चमोली पिण्डरघाटी के दर्जनों गाँव में अभी तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, हरमल, झलिया, उदयपुर, चोटिंग, रामपुर, तोरती , अभी भी सड़क ,स्वास्थ्य, शिक्षा, से बंचित है, अभी भी यहाँ कोई बेमार हो जाता है तो 8-10 कि मी पैदल जाना पड़ता है, वहाँ अभी तक दूर संचार की व्यवस्था भी नहीं है, अगर किसी ने अपने बच्चों से बात करनी पड़ती है तो तीन किलोमीटर ऊपर टापू में जाकर बात करनी पड़ती है, वही तोरती रामपुर में मोटर पुल न बनने पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, मोटर रोड़ तीन साल पहले कट चुकी है लेकिन पिण्डर नदी पर अभी तक पुल नहीं बना है, सरकार एक ओर विकास की दावा कर रही है, दुसरी ओर हम आपको धरातल की रिपोर्ट पेश कर रहे हैं, 21वीं सदी का भारत आज भी गांव की स्थिति जस की तस है यहां के नौजवान रोजगार के लिए भटकते रहते हैं और गांव में जो बुजुर्ग हैं वह अभी तक अपने बच्चों से दूरसंचार से बात करने में कोसों दूर हैं आज एक और भारत सरकार डिजिटल इंडिया की बात करता है ऑनलाइन की बात करता है लेकिन स्पिंडल घाटी में भैंस के आगे बीन बजाना वाली बात होती है अभी तक धरातल की रिपोर्ट बिल्कुल जीरो है अगले साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं सारी पार्टियां बड़े-बड़े राजनीति करते हैं और विकास की बात करते हैं इस क्षेत्र में दूर होने के कारण वोट मांगने तक नहीं आते हैं प्रत्याशियों ने अभी तक इस घाटी में अपना कदम भी नहीं रखा है अब चुनाव के टाइम पर कार्यकर्ताओं को गुमराह करके क्षेत्र में भेजे जाते हैं जिसे गरीब जनता को पैसे दारू दे कर के वोट मांगते हैं और चुनाव जीतने के बाद कोई भी प्रत्याशी या विधायक इस क्षेत्र को अपनी शक्ल नहीं दिखाता है

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