हल्द्वानी – बनभूलपुरा क्षेत्र में एक कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी द्वारा आसान लोन दिलाने का झांसा देकर दर्जनों लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी कंपनी संचालकों ने फाइल चार्ज के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से चार-चार हजार रुपये जमा कराए और निर्धारित तिथि पर लोन देने का भरोसा दिलाने के बाद कार्यालय बंद कर फरार हो गए। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, गौजाजाली क्षेत्र में किराये के एक मकान में आईएनसी फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कार्यालय संचालित किया जा रहा था। यहां आने वाले लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर उनकी सिविल हिस्ट्री जांचने के बाद 40 हजार से 60 हजार रुपये तक का लोन उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। इसके बदले प्रत्येक आवेदक से चार हजार रुपये फाइल चार्ज के रूप में जमा कराए गए और चार जुलाई तक उनके बैंक खातों में ऋण राशि भेजने का आश्वासन दिया गया।


निर्धारित तिथि बीत जाने के बावजूद जब किसी भी आवेदक के खाते में लोन की राशि नहीं पहुंची तो सोमवार रात बड़ी संख्या में लोग कार्यालय पहुंचे। वहां कार्यालय पर ताला लटका मिला, जबकि अंदर केवल मेज और कुर्सियां पड़ी थीं। कंपनी के संचालकों के फरार होने की जानकारी मिलते ही पीड़ितों में आक्रोश फैल गया और मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया।
इंद्रानगर निवासी वकील अहमद ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि इस कथित कंपनी का संचालन एक महिला और चार पुरुष कर रहे थे, जो स्वयं को गुजरात का निवासी बताते थे। पीड़ितों के अनुसार, आरोपियों ने विश्वास जीतने के लिए कई लोगों के दस्तावेज एकत्र किए और लोन स्वीकृत होने का दावा करते हुए उनसे धनराशि जमा कराई।
एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि अब तक करीब 20 लोगों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या 100 के आसपास हो सकती है और ठगी की रकम लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।
मकान मालिक भी जांच के दायरे में
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जिस मकान में कथित कंपनी संचालित हो रही थी, उसके किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अब मकान मालिक के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे मामले में उसकी किसी प्रकार की भूमिका तो नहीं रही।
एक ही परिवार के कई सदस्य बने शिकार
पीड़ितों का कहना है कि अधिक राशि का लोन मिलने की उम्मीद में कई परिवारों ने अपने दो से चार सदस्यों के नाम से आवेदन किए थे। सभी से अलग-अलग चार-चार हजार रुपये जमा कराए गए। गरीब और जरूरतमंद परिवारों ने बेहतर आर्थिक स्थिति की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई कंपनी को सौंप दी, लेकिन तय समय आने पर उन्हें न तो लोन मिला और न ही कंपनी के संचालकों का कोई पता चला।
पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी वित्तीय संस्था या लोन कंपनी में धन जमा करने से पहले उसकी वैधता और पंजीकरण की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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