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देहरादून:-सुशासन की पहचान रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री का निधन, प्रदेशभर में गई शोक की लहर दौड़

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देहरादून – उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे बी.सी. खंडूरी ने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर दौड़ गई।

बी.सी. खंडूरी उत्तराखंड की राजनीति के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने अपनी सादगी, ईमानदार कार्यशैली और सख्त प्रशासनिक फैसलों से अलग पहचान बनाई। वे दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। उनका पहला कार्यकाल वर्ष 2007 से 2009 तक तथा दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक रहा।

राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारतीय सेना में लंबी सेवाएं दीं और मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेना की पृष्ठभूमि का प्रभाव उनके प्रशासनिक कार्यकाल में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। वे अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को विशेष महत्व देते थे।

बी.सी. खंडूरी केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का कार्यभार संभाला और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को सुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के लिए याद किया जाता है। लोकायुक्त व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी उनके प्रयासों की चर्चा होती रही।

वर्तमान में उनकी पुत्री ऋतु खंडूरी उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभा रही हैं और राज्य की सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बी.सी. खंडूरी का योगदान उत्तराखंड के विकास और सार्वजनिक जीवन में सदैव याद किया जाएगा।

राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

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