कैंची धाम की छवि धूमिल करने की कोशिश? ट्रस्ट ने दिया आधिकारिक बयान….

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नैनीताल – विश्वविख्यात कैंची धाम आश्रम को लेकर सोशल मीडिया और कुछ न्यूज पोर्टलों पर प्रसारित की जा रही कथित नकारात्मक और भ्रामक खबरों के बीच ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रस्ट के अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने मीडिया के माध्यम से तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए आरोपों को निराधार बताया।

अधिवक्ता ने जानकारी दी कि कैंची धाम ट्रस्ट का गठन चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट 1890 के अंतर्गत वर्ष 1974 में किया गया था। तत्कालीन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा आश्रम की संपत्तियां ट्रस्ट के नाम दर्ज की गईं और 6 मार्च 1974 को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ। तब से ट्रस्ट का संचालन विधिवत किया जा रहा है और समय-समय पर ट्रस्टी सदस्य बदलते रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ट्रस्ट का वार्षिक ऑडिट सरकार द्वारा कराया जाता है और 31 मार्च 2024 तक का ऑडिट पूरा हो चुका है। साथ ही ट्रस्ट नियमित रूप से आयकर रिटर्न भी दाखिल करता है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती भारतीय स्टेट बैंक की टीम की निगरानी में की जाती है और राशि बैंक में जमा कराई जाती है।

राजीव बिष्ट ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, पोर्टल और यूट्यूब चैनल बिना पुष्टि के गलत जानकारियां प्रसारित कर रहे हैं, जिससे संस्थान की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि न्यायालय में लंबित जनहित याचिका पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरती जाए और उच्च न्यायालय की अवमानना से बचा जाए।

गौरतलब है कि पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला द्वारा कैंची धाम में वित्तीय अनियमितताओं और आसपास अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा गया था। न्यायालय ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित है।

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