सल्ट चुनाव होगा 2022 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल !
हल्द्वानी। (धीरज भट्ट) भाजपा व कांग्रेस में सल्ट विधानसभा सीट को लेकर नूराकुश्ती जारी है। भाजपा जहां अपने पिछले 57 सीटों के आंकड़ों को किसी भी स्तर पर कम नहीं होने देना चाहती है वहीं कांग्रेस अपने 11 के आंकडे़ को 12 में बदलने के लिए जी-तोड़ का प्रयास कर रही है। इधर
दोनों दल सल्ट सीट को जीतने के लिए जोर लगा रहे हं। वहीं सियासी विश्लेषक 2022 के विधानसभा चुनावो ंकेे लिए इसे दोनों दलेां के लिए सेमीफाइनल मानकर चल रहे हैं। उनका मानना है कि यहां से फतह करने वाली पार्टी को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल जायेगी।
ज्ञात हो कि 2017 में राज्य विधानसभा के चैथे विधानसभा चुनावों में भाजपा को 57 व कांग्रेस को 11 विधानसभा सीटें मिली थी। हालाकि इस बीच भाजपा के दो विधायकों का निधन होने पर उपचुनाव होने पर वहां हुए उपचुनावों मेें भाजपा को ही जीत मिली। इधर सल्ट में भी भाजपा के विधायक सुरेन्द्र सिंह जीना के निधन के बाद एक बार फिर यहां से उपचुनाव कराया जा रहा है। हालाकि इन चुनावों में विजय जिस पार्टी को भी मिलेगी, उसका ग्राफ बढ़ना तय है। जहां भाजपा के सम्मुख अपने 57 के आंकड़े को प्राप्त करना है वहीं कांग्रेस के समक्ष अपने 11 के ग्राफ में सुधार की चुनौती भी है। इधर दोनों दलों ने सल्ट विधानसभा चुनावों को लेकर नाक का सवाल बना लिया है। जहां भाजपा अपने स्टार प्रचारकों को यहां पर उतार रही है वहीं कांग्रेस भी यहां पर प्रचार में लगी है। हालाकि कांग्रेस की तरफ से उनके स्टार प्रचारकों में शुमार हरीश रावत स्वास्थ्य खराब होने के कारण चुनावी परिदृश्य से गायब हैं। उधर भाजपा के लिए भी यह सीट अहम मानी जा रही है। यहां से 2012 व 2017 में लगातार पार्टी चुनाव जीतते आ रही है। वहीं भाजपा के लिए अपने प्रदर्शन को सुधारने का दवाब भी रहेगा।


चुनावों से पूर्व होगा दोनों दलों का इम्तीहान
हल्द्वानी। विधानसभा चुनाव से पूर्व हो रहे उपचुनाव में दोनों दलों को यहां से चुनावी इम्तीहान से गुजरना होगा। राज्य हालाकि 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में दो उपचुनाव और लोकसभा की पांच सीटों पर चुनाव हो चुका है और इनमें भाजपा सभी सीटों पर हावी रही है। इधर पिछले चार सालों में सत्तारूढ़ भाजपा जनता के वादों पर कितना खरा उतरी। इसका रिजल्ट भी जनता जनादर्न तय करेगी।
टीएसआर का भी लिटमस टेस्ट
हल्द्वानी। सीएम टीएसआर का भी सल्ट विधानसभा चुनावों मंे लिटसम टेस्ट होना तय है। हालाकि उनको सीएम बना अभी एक महीना हुआ है लेकिन इन चुनावो में भाजपा के पिछले चार साल के लेखा-जोखे का जनता अपना रिजल्ट सुनायेगी। वहीं इन चुनावों पर तमाम सियासी दिग्गजों का भविष्य भी तय होगा।

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