600 मजदूरों के घरों को 04 साल से अंधेरे में रखने वाले इन्टरार्क कंपनी प्रबंधक ने दिवाली की तैयारी का बहाना बना कर आयोजित वार्ता से किया किनारा कहा बयस्थता के कारण संभव नहीं है ,21अक्टूबर को वार्ता मे पहुंचना ,जिला प्रशासन ने नतमस्तक होकर प्रबन्धक की अपील को आदेश की तरह स्वीकार किया और 29 अक्टूबर को वार्ता की नई तारीख तय की। ऐसा लगता है कि इंटरार्क कंपनी प्रबंधन ज्यादा मेहनती और बयस्थ है और उसकी तुलना में पूरे जिले की ब्यवस्था व जिम्मेदारी रखने वाला जिला प्रशासन कम ब्यस्त है और इंटरार्क कंपनी प्रबंधन के लिए बैठा है खाली ।अगली तारीख को भी यही सब हो तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए।
ALC को कड़े शब्दों में अवगत करा दिया गया है कि महापंचायत द्वारा घोषित 14 सदस्यीय वार्ताकार टीम ही वार्ता में होगी शामिल इन्टरार्क के दोनों प्लांटों में धड़ल्ले से चल रहा है गैरकानूनी रूप से ठेका मजदूरों का नियोजन, श्रम विभाग, जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने कर रखे हैं आंख और कान बंद।


18 नवंबर को होने वाले मजदूर किसान महापंचायत को प्रचारित करने में लगे मजदूर लोगों से मिलकर महापंचायत में आने को कर रहे हैं अपील।
16 अगस्त 2021 से कंपनी प्रबंधक द्वारा किए जा रहे शोषण एवं उत्पीड़न के विरोध में मजदूरों द्वारा दोनों प्लांटों के बाहर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है, कंपनी प्रबंधक द्वारा मजदूरों को 4 वर्षों से वेतन वृद्धि ,बोनस ,एलटीए व अन्य सुविधा नहीं दी जा रही है एवं तरह तरह के झूठे आरोप लगाकर फैक्ट्री परिसर से मजदूरों को बाहर किया जा रहा है लगातार अत्याचार और मजदूरों के ऊपर झूठे मुकदमे ,एफ आई आर ,जान से मारने की धमकी जैसी खतरनाक कार्यवाही की जा रही है ताकि मजदूर अपनी आवाज को ना उठाएं।
लगभग 600 मजदूरों का पिछले 4 वर्षों से दिवाली का बोनस ना देने वाली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि 21 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में प्रशासनिक कमेटी द्वारा आयोजित विवाद के निस्तारण की वार्ता मे महज इसलिए नहीं उपस्थित हो सकते क्योंकि कंपनी को खुशियां मनाने के लिए दीपावली की तैयारियां करनी है। पिछले 15 महीनों से आंदोलनरत श्रमिक एवं उनका परिवार कंपनी प्रबंधक के अड़ियल रवैया से सबको वाकिफ करवाने का प्रयास कर रहा हैं की कंपनी प्रबंधकों की मनमानी किस हद तक बढ़ गई है,जिसकी कड़ी में प्रबंधक की ऐसी सोच एक मुख्य भूमिका निभा रही हैं ,इससे स्वत: ही पता चलता है कि कंपनी प्रबंधक अपने 600 स्थाई मजदूरों के परिवारों को कोई महत्व नहीं देते हैं,
जिनके घर में पिछले 4 सालों से दिवाली नहीं मनाई गई है, और प्रबंधक अपनी दिवाली के लिए 15 महीने से चल रहे विवाद की वार्ता को महत्व न देते हुए कहते हैं कि वार्ता में उपस्थित होने की संभावना नहीं है क्योंकि हम दिवाली की तैयारियों में व्यस्त हैं, अथवा रहेंगे।
अतः नियत तिथि को आगे बढ़ा दिया जाए।
समझ के बाहर की बात है कि जिस फैक्ट्री के सभी स्थाई मजदूर फैक्ट्री से बाहर है तो दिवाली की पूजा कंपनी प्रबंधक किन के साथ करना चाहते हैं और खुशियां किन के साथ बांटना चाहते हैं।
फैक्ट्री प्रबंधक के लालच को दर्शाता व भ्रष्टाचार को रेखांकित करता हुआ गैर कानूनी ठेका प्रथा अभी भी फैक्ट्री के दोनों प्लांटों में बिना रोक-टोक धड़ल्ले से जारी है जिसमें अप्रशिक्षित ठेका मजदूरों को गैर कानूनी रूप से फैक्ट्री परिसर में खतरनाक मशीनों एवं मुख्य उत्पादन गतिविधियों में पूर्ण रूप से नियोजित किया गया है, शामिल किया गया है और कुछ मजदूरों को बंधक बनाकर भी फैक्ट्री के भीतर काम कराया जा रहा है कुछ मजदूरों से जबरिया ओवरटाइम करवाया जा रहा है लेकिन प्रबंधक का डर मजदूरों पर हावी है और डरे हुए ठेका मजदूर मजबूर बने हुए हैं।
जिसकी सूचना अनगिनत बार जिला प्रशासन ,श्रम विभाग एवं पुलिस प्रशासन से इन्टरार्क मजदूर संगठन द्वारा की जा चुकी हैं लेकिन सभी अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधक के इस गैरकानूनी क्रिया कलापों को देखते हुए भी अपनी आंख और अपने कान को बंद कर रखा है जोकि यही इशारा करता है कि कंपनी प्रबंधक की सांठगांठ इतनी मजबूत है की कानूनों व सरकारों पर पूरा नियंत्रण कंपनी प्रबंधक का है।
सभा में 18 नवंबर को होने वाले मजदूर किसान महापंचायत को निर्णायक बनाने के लिए मजदूरों में जरूरी निर्देश दिए गए और प्रचार प्रसार में लगे अन्य मजदूर साथियों को प्रोत्साहित भी किया गया महापंचायत के प्रचार प्रसार को करने के लिए सभी साथी पूरे उत्साह से जुटे हुए हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में महापंचायत को विशाल रूप देने के उद्देश्य से लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं।
मजदूर नेताओं द्वारा कहा गया की कंपनी प्रबंधक और जिला प्रशासन को बता देना चाहते हैं कि 18 नवंबर वह अंतिम दिन होगा जहां मजदूर अपना ठोस और निर्णायक कदम उठाने से नहीं चूकेंगे जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधक एवं जिला प्रशासन की होगी।
सभा के दौरान सैकड़ों मजदूर व महिलाएं उपस्थित रही।
इंकलाब जिंदाबाद ।
मजदूर किसान एकता जिंदाबाद। जब तक समाधान नहीं तब तक आराम नहीं।

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