पन्त नगर- जेबीएम ग्रुप ने पन्त नगर में स्थित अपने संयंत्र में 6वें रक्तदान शिविर का आयोजन किया, जिसमें 100 यूनिट ब्लड का दान हुआ। इस अवसर पर रुद्रपुर के मेयर रामपाल सिंह ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। इसके अलावा इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों और जेबीएम टीम मौजूद थी। कंपनी ने इस साल अगस्त में इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किये थे और पूरे भारत में अपने संयंत्रों में 25 रक्तदान शिविर आयोजित करने का संकल्प लिया था। एक साल की इस पहल में आज का शिविर 6वां था और इससे पहले 5 शिविरों में जेबीएम ग्रुप 800 यूनिट्स से ज्यादा ब्लड दान कर चुका है।
जेबीएम ग्रुप की सीएसआर शाखा नील फाउंडेशन ने इस साल 3500 यूनिट्स रक्त के दान का संकल्प लिया था, ताकि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की मदद करने के महान कार्य में सहयोग दिया जा सके। आज के आयोजन में जेबीएम ग्रुप के कर्मचारियों, उनके परिवारों और दोस्तों ने बड़े उत्साह से भाग लिया और इस महान कार्य में योगदान के लिये आगे आये। रक्तदान से पहले हर डोनर की विस्तृत मेडिकल जाँच और रक्त का परीक्षण हुआ था, जैसे हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, वजन लेना आदि। इस शिविर से रक्तदान, उसकी जरूरत और सामाजिक जिम्मेदारी पर समाज के विभिन्न साझीदारों के बीच सफलतापूर्वक जागरूकता निर्मित की गई।


थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को मदद मिलेगी
थैलेसीमिया खून की एक गंभीर पैतृक बीमारी है। इस रोग से पीड़ित बच्चे को हर दो सप्ताह में एक यूनिट खून की जरूरत होती है। थैलेसीमिया में जीवित रहने के लिये जिंदगीभर बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन और आयरन चीलेशन करना पड़ता है। रेड ब्लड सेल ट्रांसफ्यूजर सबसे आम इलाज है और ब्लड बैंकों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होती है। जेबीएम ग्रुप के कर्मचारियों और उनके परिवारों ने इन शिविरों में भाग लेने और रक्तदान करने का संकल्प लिया था, ताकि इस कार्य में सहयोग मिले और इन बच्चों की मदद की जा सके।
जेबीएम ग्रुप के वैल्यू इकोसिस्टम के अनिवार्य हिस्से के तहत, संस्थान अपने कर्मचारियों और समुदायों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को बेहतर बनाने तथा पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा के लिये उच्चतम मानकों को बरकरार रखने के लिए तत्पर है। यह ग्रुप कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की अपनी शाखा नील फाउंडेशन के माध्यम से कई गतिविधियों का निष्पादन करता है। वह समाज के जीवन को बेहतर बनाने में विश्वास रखता है और अपने पर्यावरणीय संतुलन तथा इसकी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करता है।

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