हल्द्वानी/काठगोदाम – उत्तराखंड परिवहन निगम के काठगोदाम डिपो में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद गहरा गया है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) पर तानाशाही, पक्षपातपूर्ण कार्यशैली और कर्मचारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए बुधवार से डिपो परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिषद ने चेतावनी दी है कि जब तक कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होता और कथित उत्पीड़न बंद नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
परिषद के पदाधिकारियों का आरोप है कि सहायक महाप्रबंधक संगठन से जुड़े कर्मचारियों को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं तथा उन्हें नौकरी से हटाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि जब भी संगठन अपनी मांगों को लेकर वार्ता के लिए पहुंचता है, तब अन्य संगठन के लोगों को बुलाकर दबाव बनाने और अभद्र व्यवहार करने का प्रयास किया जाता है।


वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा विवाद
संयुक्त परिषद के अनुसार 14 जुलाई को प्रबंधन के साथ हुई वार्ता भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। परिषद का आरोप है कि वार्ता विफल होने के बाद भी समस्याओं के समाधान के बजाय संगठन के पदाधिकारियों को फोन पर धमकियां दी गईं, जिससे कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया।
संगठनों में विवाद कराने का आरोप
परिषद ने आरोप लगाया कि एजीएम कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों के बीच विवाद पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि 310 सूची के मामले में पारदर्शिता की मांग के बावजूद आदेशों को जानबूझकर रोका गया और वार्ता वाले दिन लागू कर कर्मचारियों के बीच तनाव का माहौल बनाया गया।
बस संचालन प्रभावित करने का भी आरोप
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा फिट घोषित बसों को भी एजीएम के निर्देश पर मार्ग से हटाया जा रहा है। इससे निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा है और यात्रियों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बसों को बीच मार्ग से वापस बुलाकर अन्य रूटों पर भेजा गया, जबकि समान स्थिति वाली अन्य बसें डिपो में खड़ी रहीं।
लोकतांत्रिक माहौल बहाल करने की मांग
परिषद का कहना है कि डिपो में कर्मचारियों के लिए स्वस्थ और लोकतांत्रिक कार्य वातावरण बनाया जाए तथा प्रबंधन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कार्य करे। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं होगा और उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
परिषद ने कहा कि आंदोलन के कारण यदि परिवहन सेवाएं प्रभावित होती हैं या यात्रियों को असुविधा होती है, तो इसकी जिम्मेदारी डिपो प्रबंधन की होगी।

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