रुद्रपुर – उत्तराखंड में मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गुरुवार को राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक क्षमता का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी और तकनीक आधारित प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू कर रही है। इन तकनीकों के माध्यम से संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है तथा रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को भी अधिक सक्षम बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता अभियानों को आपदा जोखिम कम करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संचालित राहत एवं बचाव अभियानों ने वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीकों, त्वरित निर्णय क्षमता और टीमवर्क की उत्कृष्ट मिसाल पेश की है। उन्होंने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों और कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। साथ ही प्रत्येक नागरिक तक आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन संपर्क नंबरों और प्राथमिक सावधानियों की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को न्यूनतम करना, जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उत्तराखंड को देश का सबसे सक्षम, तकनीक-सक्षम एवं जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है। उन्होंने सभी अधिकारियों से पूर्व तैयारी, आधुनिक तकनीक, प्रभावी समन्वय और जनसहभागिता के बल पर उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने जनपद ऊधमसिंह नगर में आयोजित मॉक ड्रिल की जानकारी देते हुए बताया कि काशीपुर, बाजपुर, रुद्रपुर, सितारगंज और खटीमा में पांच अलग-अलग आपदा परिदृश्यों पर आधारित व्यापक अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और राहत-बचाव कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।
उन्होंने बताया कि रुद्रपुर क्षेत्र के टांडा रेंज स्थित संजय वन हाईवे पर आंधी-तूफान के कारण वृक्ष गिरने और मार्ग अवरुद्ध होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल बैरिकेडिंग कर यातायात नियंत्रित किया। स्वास्थ्य विभाग ने घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देकर जिला अस्पताल भेजा, जबकि राहत दल ने वुड कटर की सहायता से पेड़ हटाकर मार्ग को पुनः यातायात के लिए खोल दिया।
बाजपुर में भारी वर्षा से देवहा नदी का जलस्तर बढ़ने और लेवड़ा पुल में दरार आने के साथ एप्रोच रोड कटने की स्थिति का अभ्यास किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर विद्युत आपूर्ति बंद की गई और लगभग 300 ग्रामीणों को सुरक्षित राहत शिविर में पहुंचाया गया। एनडीआरएफ ने फंसे लोगों का रेस्क्यू किया, गंभीर घायल को हायर सेंटर भेजा गया तथा पुल के निरीक्षण के बाद वैकल्पिक मार्ग से यातायात बहाल किया गया।
सितारगंज में बेगुल नदी के जलस्तर बढ़ने से बमनपुरी में तटबंध क्षतिग्रस्त होने और लोगों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी से मलबा हटाया, घायलों को अस्पताल भेजा गया तथा वन विभाग ने घटनास्थल पर मिले सांप और मगरमच्छ का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा। सिंचाई विभाग ने सैंडबैग लगाकर तटबंध की मरम्मत की और यातायात पुनः सुचारु कराया।
काशीपुर में 20 नंबर विद्युत उपकेंद्र में जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने तथा करंट लगने से कर्मचारी के घायल होने की स्थिति पर अभ्यास किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने घायल कर्मचारी का उपचार किया, जबकि फायर सर्विस ने डी-वाटरिंग पंप की सहायता से जल निकासी कर विद्युत उपकेंद्र को सुरक्षित बनाया और निरीक्षण के बाद बिजली आपूर्ति बहाल की गई।
खटीमा स्थित मां कामधेनु वात्सल्य गौशाला में जलभराव से 158 पशुओं के प्रभावित होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। राहत एवं बचाव दल ने पशुओं का सुरक्षित रेस्क्यू किया तथा घायल पशुओं को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय भेजा। वन विभाग ने गौशाला क्षेत्र में मिले मगरमच्छ और सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ा, जबकि घायल कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाया गया।
जिलाधिकारी ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन, सिंचाई, लोक निर्माण, विद्युत, पशुपालन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सहित सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और उपलब्ध संसाधनों की प्रभावशीलता का सफल परीक्षण किया गया।
मॉक अभ्यास के उपरांत आयोजित समीक्षा बैठक में एसपी सिटी डॉ. उत्तम सिंह नेगी, उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी ईशान कटारिया, मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेन्द्र मिश्रा, अधीक्षण अभियंता सिंचाई पी.के. दीक्षित, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग अनिल पांगती, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उमा शंकर नेगी, जिला युवा कल्याण अधिकारी बी.एस. रावत, जिला पंचायतराज अधिकारी विद्या सिंह सोमनाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।

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