पिथौरागढ़ – उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पहली ही मानसूनी बारिश ने जिले के कई हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। जगह-जगह पहाड़ दरकने और भारी भूस्खलन के कारण नौ प्रमुख ग्रामीण सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे 40 से अधिक गांवों का संपर्क शेष दुनिया से कट गया है। सड़कें बंद होने से करीब 15 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित हुई है और ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों, इलाज और बाजार तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी सीमा से होते हुए मानसून निर्धारित समय से लगभग आठ दिन की देरी से मंगलवार को उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पहुंचा। मानसून के प्रवेश के साथ ही सोमवार रात से पिथौरागढ़ जिले के अधिकांश क्षेत्रों में झमाझम बारिश शुरू हो गई। बारिश से जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों से मलबा और बोल्डर गिरने के कारण कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं।


भूस्खलन के चलते डीडीहाट-पमस्यारी, आदिचौरा-सीणी, बांसबगड़-कोटा, तवाघाट-थानीधार, छेड़ा-आगर, ड्योरा-बारमो, बुंगाछीना-कुसैल, बेड़ीनाग-दौलीगाड़-पौसा तथा गलाती-रमतोली-धामी गांव को जोड़ने वाले मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सड़कें बंद होने से ग्रामीणों का गांवों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर लोग जान जोखिम में डालकर मलबे और दरकते पहाड़ों के बीच पैदल अस्पताल और बाजार तक पहुंचने को मजबूर हैं।
हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सड़क खोलने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर जेसीबी मशीनें तैनात कर दी गई हैं और युद्धस्तर पर मलबा हटाने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द सभी मार्गों पर यातायात बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बीच मौसम विभाग ने बुधवार के लिए पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही और ट्रेकिंग पर रोक लगाने, आईआरएस प्रणाली के नामित अधिकारियों तथा सभी नोडल अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक वर्षा थल क्षेत्र में 75.3 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि मुनस्यारी में सबसे कम 1.2 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा पिथौरागढ़ में 3 मिलीमीटर, बेड़ीनाग में 56 मिलीमीटर, बंगापानी में 6 मिलीमीटर, देवलथल में 7.2 मिलीमीटर, डीडीहाट में 27.8 मिलीमीटर, धारचूला में 43 मिलीमीटर तथा कनालीछीना में 5.5 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। मंगलवार सुबह से जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहा, हालांकि दोपहर बाद मौसम कुछ सामान्य होने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
उधर, थल-सातशिलिंग सड़क पर मंगलवार तड़के तेज बारिश और आंधी के कारण नागीमल पहाड़ी के पास एक विशाल फल्यांट का पेड़ सड़क पर गिर गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सुबह पांच बजे सूचना मिलने पर थल थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र पांडे के निर्देशन में अपर उपनिरीक्षक भुवन चंद्र पांडे, हेड कांस्टेबल शंकर सिंह देवड़ी, राजेश कुमार तथा होमगार्ड नरेंद्र सिंह ने आपदा उपकरणों की सहायता से करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पेड़ को काटकर हटाया। सुबह छह बजे सड़क पर दोबारा यातायात सुचारु कराया गया, जिससे यात्रियों ने राहत की सांस ली।
इसी प्रकार सोमवार रात हुई बारिश के कारण गणाईगंगोली-बनकोट सड़क पर भी भारी मलबा आ गया, जिससे दुग्ध वाहन सहित कई वाहन घंटों तक फंसे रहे। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र मेहता ने लोक निर्माण विभाग को इसकी सूचना दी, जिसके बाद मंगलवार सुबह विभाग की जेसीबी मशीन मौके पर पहुंची और मलबा हटाकर मार्ग पर यातायात बहाल किया गया।
लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे न जाने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना देने की अपील की है।

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