हल्द्वानी/नैनीताल – नैनीताल जनपद में निजी विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों में मनमाने तरीके से शुल्क वसूले जाने और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने जिले के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कई निजी विद्यालय शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क तथा अन्य विभिन्न मदों में अनाधिकृत और मनमाना शुल्क वसूल रहे थे। जारी आदेश के अनुसार अब प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक एवं औचित्यपूर्ण खर्च के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण शुल्क एवं परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में लिया जाएगा, जिसे न्यूनतम रखा जाएगा तथा इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की स्वीकृति अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।


प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार द्वारा बोर्ड से संबद्धता के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही शुल्क वृद्धि कर सकेंगे और इसके लिए भी पीटीए की अनुमति आवश्यक होगी। मनमाने ढंग से शुल्क बढ़ाने पर संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा शुल्क और टीसी शुल्क भी तय
आदेश के अनुसार पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक तथा एक वार्षिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। बोर्ड कक्षाओं के लिए अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही ली जा सकेंगी। परीक्षा शुल्क प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका एवं अन्य आवश्यक सामग्री की वास्तविक लागत के आधार पर निर्धारित होगा। किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क 600 रुपये से अधिक नहीं होगा, जबकि स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) का शुल्क केवल एक रुपये निर्धारित किया गया है।
एकमुश्त फीस जमा करने की बाध्यता समाप्त
अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा वार्षिक शुल्क जमा करने का विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद देना विद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा।
अतिरिक्त वसूली जुलाई की फीस में होगी समायोजित
प्रशासन के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का समायोजन 1 जुलाई 2026 से देय शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त वसूली गई राशि जुलाई माह की फीस से अधिक होगी तो शेष धनराशि आगामी महीनों की फीस में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिनों के भीतर समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
नियम तोड़े तो होगी कड़ी कार्रवाई
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत एक लाख रुपये तथा सीबीएसई बायलॉज के तहत पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड, मान्यता समाप्त करने, एनओसी निरस्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन की इस पहल को निजी विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा अभिभावकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम माना जा रहा है।

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