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प्रायोगिक शिक्षा से भारतीय ज्ञान प्रणाली और व्यक्तित्व विकास पर विशेष कार्यशाला आयोजित….

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रुद्रपुर- “प्रायोगिक शिक्षा के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) और व्यक्तित्व विकास” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला छात्रों और शिक्षकों  दोनों के लिए अलग-अलग सत्रों में आयोजित की गई। प्रोफेसर उमेश आर्य, पूर्व डीन और चेयरमैन मीडिया अध्ययन संकाय, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार, इस कार्यशाला के संसाधन व्यक्ति थे।

कार्यशाला की शुरुआत संस्कृत के इस उद्धरण से हुई, “स तु दीर्घकालनैरन्तर्यसत्कारासेवितो दृढभूमिः”। प्रोफेसर आर्य ने पतंजलि योग सूत्र पर बात की, उन्होंने कहा कि आईकेएस एक विषय नहीं बल्कि आत्म-साक्षात्कार है, और उन्होंने कहा कि प्रत्येक विषय को जीवन से संबंधित होना चाहिए। उन्होंने मौन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। विचारोत्तेजक चर्चाओं और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से, प्रतिभागियों ने उन नवीन पद्धतियों का पता लगाया जो पारंपरिक शैक्षणिक सीमाओं से परे हैं। यह सत्र एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव रहा, जिसने सभी के लिए आजीवन सीखने और समग्र विकास की संस्कृति को मजबूत किया।

संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार बिष्ट ने कहा, “यह कार्यशाला छात्रों और शिक्षकों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) और व्यक्तित्व विकास का ज्ञान हमारे जीवन को बेहतर बनाने में सहायक है।” इस कार्यशाला के आयोजन समन्वयक संदीप अभिषेक और सह-समन्वयक श्री त्रिलोक सिंह lथे। यह सत्र एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव रहा, जिसने सभी के लिए आजीवन सीखने और समग्र विकास की संस्कृति को मजबूत किया!

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