रुद्रपुर – शहीद खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर बुधवार को ‘आरक्षण हमारा अधिकार’ आंदोलन के 95वें दिन श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं, समाजसेवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उनके साहस, त्याग और देशप्रेम से प्रेरणा लेते हुए बंगाली समाज के अधिकारों की लड़ाई को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे जारी रखने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन अब केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे व्यापक सामाजिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। बंगाली समाज के विभिन्न संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों को एक मंच पर लाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।


खुदीराम बोस के संघर्ष से ली प्रेरणा
वक्ताओं ने शहीद खुदीराम बोस के जीवन और बलिदान को याद करते हुए कहा कि कम उम्र में ही उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनके साहस और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेकर युवाओं को भी अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखना चाहिए।
‘95 दिन क्या, 1095 दिन भी संघर्ष करेंगे’
समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि खुदीराम बोस का जीवन युवाओं के लिए त्याग और संघर्ष की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो समाज के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि “95 दिन क्या, जरूरत पड़ी तो 1095 दिन भी धरना और संघर्ष कर सकते हैं। समाज के अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए हरसंभव प्रयास जारी रहेगा।”
उन्होंने कहा कि न्याय और अधिकार की लड़ाई में धैर्य, एकता और दृढ़ संकल्प जरूरी है।
20 सितंबर को बड़े आंदोलन की तैयारी
कार्यक्रम में आगामी 20 सितंबर को जिला मुख्यालय घेराव सहित बड़े आंदोलन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन में बंगाली समाज की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया जाएगा।
साथ ही समाज के अलग-अलग संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद कर उन्हें आंदोलन से जोड़ने की रणनीति बनाई जाएगी।
‘अधिकारों की लड़ाई पूरे समाज की लड़ाई’
वरिष्ठ समाजसेवी तरुण विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज की आरक्षण सहित अन्य मांगें किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ी हैं। उन्होंने सभी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने का आह्वान किया।
समाजसेवी सपन सरकार ने कहा कि समाज के प्रत्येक मूलभूत अधिकार के लिए आवाज उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे आकर सामाजिक अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करना होगा।
आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने की तैयारी
बैठक में निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में गांवों, नगरों और विभिन्न क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं वरिष्ठ समाजसेवियों से भी संवाद किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने शहीद खुदीराम बोस को नमन करते हुए उनके साहस और देशप्रेम को अपने संघर्ष की प्रेरणा बनाने का संकल्प लिया।
इस दौरान सुब्रत कुमार विश्वास, तरुण विश्वास, दीपक विश्वास, सपन सरकार, अमल मंडल, निमेष राय, भजन राय, निपेन विश्वास, जयदेव मादक, विकास सरकार, आशीष, संजय आईस, अजय, विद्युत, विकास विश्वास, रोहित मंडल, अभिमन्यु सना, राकेश सिकदर, विनोद, अनिल, विक्की राय सहित बड़ी संख्या में युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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