नैनीताल – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा लागू भू-कानून के तहत नैनीताल जिले में निर्धारित प्रयोजन के विपरीत भूमि का उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशन में न्यायालय उपजिलाधिकारी, नैनीताल ने सात प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए कुल 1.822 हेक्टेयर यानी 91 नाली 1 मुट्ठी भूमि राज्य सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा भूमि के क्रय-विक्रय की प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भू-कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


धार्मिक गतिविधि नहीं मिली, जमीन खाली पड़ी थी
उपजिलाधिकारी नवाज़िश खलिक ने बताया कि राजस्व अभिलेखों और स्थलीय जांच के दौरान ग्राम कमड़ा, पट्टी मल्ली कुटौली तथा ग्राम शीतला, पट्टी मल्ली कुटौली में धार्मिक प्रयोजन के लिए खरीदी गई कुल 1.562 हेक्टेयर भूमि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं पाया गया। मौके पर भूमि खाली पड़ी थी और वहां कोई धार्मिक गतिविधि संचालित होती नहीं मिली।
वहीं, ग्राम सतबूंगा, पट्टी सतबूंगा में कृषि प्रयोजन के लिए खरीदी गई 0.260 हेक्टेयर भूमि का भी कृषि कार्य में उपयोग नहीं किया जा रहा था। स्थलीय निरीक्षण में भूमि बंजर अवस्था में पाई गई।
पक्ष रखने का दिया गया पूरा अवसर
प्रशासन के अनुसार संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक अभिलेख एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया। इसके बाद भूमि क्रय की अनुमति, राजस्व अभिलेख, अनुमति की शर्तों, उपलब्ध साक्ष्यों और स्थलीय जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया गया।
जांच में यह प्रमाणित हुआ कि संबंधित भूमि का उपयोग उस विशिष्ट प्रयोजन के लिए नहीं किया गया, जिसके आधार पर उसे खरीदने की अनुमति प्रदान की गई थी।
इसके बाद न्यायालय उपजिलाधिकारी, नैनीताल ने सातों प्रकरणों में संबंधित अंतरणों को विधि-विरुद्ध मानते हुए उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की उत्तराखंड में यथाप्रवृत्त धारा 166/167 के तहत कुल 1.822 हेक्टेयर भूमि को सभी भारों से मुक्त कर राज्य सरकार में निहित करने के आदेश पारित किए।
आदेश के अनुपालन में संबंधित राजस्व अधिकारियों को राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने तथा भूमि के संबंध में नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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