नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से स्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई का शुभारंभ गरिमामय वातावरण में हुआ संपन्न

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

ख़बर शेयर करें -

नैनीताल – जनपद नैनीताल के विकासखण्ड कोटाबाग के ग्राम गिंटी में आज नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से स्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई का शुभारंभ गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह इकाई गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कीट विज्ञान विभाग तथा कास्तकार विकास समिति द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित परियोजना के अंतर्गत स्थापित की गई है। परियोजना की कुल लागत ₹43.57 लाख है, जिसमें नाबार्ड द्वारा ₹30.90 लाख का अनुदान प्रदान किया गया है। परियोजना का उद्देश्य प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना, किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध कराना तथा पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों का व्यापक प्रसार करना है।

कार्यक्रम में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान), कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता, नाबार्ड, नैनीताल के जिला विकास प्रबंधक, कीट विज्ञान विभाग एवं पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, नैनीताल के वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, वरिष्ठ बैंक अधिकारी, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा क्षेत्र के लगभग 80 प्रगतिशील कृषकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना समन्वयक डॉ. आर. पी. मौर्य ने परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति देते हुए बताया कि इस पहल के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग में कमी आएगी, उत्पादन लागत घटेगी तथा प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने परियोजना की अवधारणा, अब तक की प्रगति, किसानों के प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रमों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इसके उपरांत सभी अतिथियों ने नवस्थापित जैव नियंत्रण उत्पादन प्रयोगशाला का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान प्रयोगशाला में स्थापित आधुनिक संयंत्र एवं मशीनरी, विभिन्न लाभकारी सूक्ष्मजीवों की तैयार की जा रही कल्चर, जैव नियंत्रण एजेंटों के उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया तथा गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली का प्रदर्शन किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस इकाई में तैयार किए जाने वाले जैव नियंत्रण उत्पाद किसानों को सुरक्षित, प्रभावी एवं पर्यावरण हितैषी विकल्प उपलब्ध कराएंगे, जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बल मिलेगा।

इस अवसर पर नाबार्ड, नैनीताल के जिला विकास प्रबंधक ने अपने संबोधन में कहा कि नाबार्ड केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार एवं सतत आजीविका संवर्धन का एक प्रमुख भागीदार है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा सुरक्षित खाद्य उत्पादन की वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए जैव नियंत्रण आधारित तकनीकों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नाबार्ड के सहयोग से स्थापित यह उत्पादन इकाई नैनीताल जनपद के किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान, प्रदर्शन एवं तकनीकी मार्गदर्शन का उत्कृष्ट केंद्र सिद्ध होगी तथा भविष्य में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नाबार्ड जनपद में किसान उत्पादक संगठनों, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन, कृषि उद्यमिता तथा नवाचार आधारित परियोजनाओं को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है और यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं अनुकरणीय पहल है।

कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिकों ने किसानों से जैव नियंत्रण तकनीकों को अपनाने तथा रासायनिक कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग का आह्वान किया। किसानों ने प्रयोगशाला एवं उत्पादन व्यवस्था का अवलोकन कर इस पहल की सराहना की तथा इसे सुरक्षित, टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। नाबार्ड के सहयोग तथा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर एवं कृषि विज्ञान केंद्र, कोटाबाग के संयुक्त प्रयासों से स्थापित यह परियोजना जनपद नैनीताल में वैज्ञानिक, पर्यावरण अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि विकास को नई दिशा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

और पढ़ें

error: Content is protected !!