हरिद्वार पुलिस का बड़ा खुलासा, बच्चा चोरी और मानव तस्करी गिरोह ध्वस्त – दो महिलाओं सहित छह तस्कर गिरफ्तार

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हरिद्वार – हरिद्वार पुलिस ने कनखल क्षेत्र से तीन वर्षीय बच्ची के अपहरण मामले का खुलासा करते हुए एक अंतर्राज्यीय बच्चा चोरी एवं मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर अपहृत बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। कार्रवाई के दौरान दिल्ली रेलवे स्टेशन से चोरी किए गए एक अन्य डेढ़ वर्षीय बच्चे को भी सुरक्षित बरामद किया गया है।

बुधवार को एसपी सिटी कार्यालय मायापुर में आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 6 जून को कनखल क्षेत्र के बैरागी कैंप स्थित झुग्गी बस्ती निवासी विनोद सोलंकी ने अपनी तीन वर्षीय पुत्री राधिका के अपहरण की सूचना पुलिस को दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर पुलिस एवं सीआईयू की संयुक्त टीमों का गठन किया गया।

एसएसपी ने बताया कि जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए फिरौती की संभावना कम थी। ऐसे में पुलिस ने बच्चा चोरी और मानव तस्करी के दृष्टिकोण से जांच शुरू की। सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, डंप डाटा का विश्लेषण किया गया तथा मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया।

जांच के दौरान मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दबिश दी गई। पुलिस की सक्रियता से घबराकर गिरोह के कुछ सदस्य अपहृत बच्ची को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर छोड़कर फरार हो गए। सूचना मिलने पर हरिद्वार पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया।

इसके बाद पुलिस ने मोहम्मद आकिल, नसीमा, जुल्फेकार, धर्मेंद्र कुमार, प्रीति शर्मा और शिवा सिंह उर्फ गौरव को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे बच्चों की चोरी कर उन्हें निसंतान दंपतियों को दो से पांच लाख रुपये तक में बेचते थे।

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह ने 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक अन्य बच्चे का अपहरण किया था। बाद में उस डेढ़ वर्षीय बच्चे का डेढ़ लाख रुपये में सौदा कर उसे उत्तर प्रदेश के बदायूं में बेच दिया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बच्चे कार्तिक को भी सकुशल बरामद कर लिया। मामले की सूचना दिल्ली पुलिस को भी दे दी गई है।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि गिरोह के प्रत्येक सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। कुछ सदस्य बच्चों की रेकी कर उन्हें चोरी करते थे, जबकि अन्य आरोपी बच्चों को दूसरे राज्यों में ले जाकर खरीदार तलाशते थे। गिरोह बच्चों को अपना या अनाथ बताकर निसंतान दंपतियों को बेच देता था। जांच में यह भी सामने आया कि मोहम्मद आकिल और प्रीति शर्मा बच्चों की कीमत तय करने और सौदा कराने में प्रमुख भूमिका निभाते थे।

पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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