दोनों पक्ष आमने-सामने, पुलिस ने मांगे अभिलेख; शिकायत में फर्जी बैंक खाता, संपत्ति पर कब्जे की साजिश और फीस गबन के आरोप
हल्द्वानी। शहर के कमलुआगांजा स्थित मरियम पैरामेडिकल कॉलेज को लेकर विवाद अब कानूनी जांच के दायरे में पहुंच गया है। कॉलेज का संचालन करने वाली मरियम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल एवं मुखानी थाना पुलिस को शिकायत देकर कॉलेज की संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, फर्जी बैंक खाता खोलने, छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए हैं। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2009 में सोसायटी ने करीब 1.6 एकड़ भूमि खरीदकर मरियम पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना की थी। वर्तमान में कॉलेज में लगभग 150 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। संस्थापक पक्ष का आरोप है कि फरवरी 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष के न्यायिक अभिरक्षा में जाने के बाद शिक्षिका दया पांडे को केवल अस्थायी रूप से कॉलेज की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि बाद में उन्होंने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर स्वयं को प्राचार्य बताते हुए कॉलेज के संचालन और संपत्ति पर अधिकार जताने का प्रयास किया।


शिकायत में प्रकाश सिंह मेहरा, बहादुर सिंह, डॉ. पल्लवी धौलाखंडी और दिनेश सिंह धौलाखंडी पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया है। यह भी दावा किया गया है कि सोसायटी की अनुमति के बिना “Maryam College of Paramedical Education” के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खोलकर छात्रों की फीस जमा कराई गई और उसका कथित दुरुपयोग किया गया।
संस्थापक पक्ष ने अपने प्रेस बयान में प्रकाश सिंह मेहरा को पूरे कथित षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताते हुए उनके खिलाफ पूर्व में फर्जी डिग्री प्रकरण में जेल जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता पक्ष के दावे हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उधर, दया पांडे ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में अब्दुल मलिक समेत कुछ लोगों पर कॉलेज पहुंचकर संचालन में हस्तक्षेप करने, अभद्रता करने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं।
मुखानी पुलिस ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावों के समर्थन में वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। संस्थापक पक्ष का कहना है कि उसने स्वामित्व और संचालन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं, जबकि दूसरे पक्ष ने कुछ वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।
संस्थापक पक्ष के अनुसार 25 जुलाई को जब सोसायटी के सदस्य कॉलेज के आय-व्यय और संचालन की समीक्षा के लिए पहुंचे, तब कांग्रेस नेता किरन डालाकोटी, भाजपा नेता समीर आर्य, देवेंद्र मेर और वीरेंद्र पाल संधू भी मौके पर मौजूद थे। उनका दावा है कि घटनाक्रम देखकर मौजूद लोग भी पूरे मामले से आश्चर्यचकित रह गए।
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब जांच एजेंसियों द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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