हल्द्वानी-बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले पर रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने को लेकर 8 सप्ताह का समय मांगा है सुनवाई 2 मई को होगी, कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँचे सुमित ने रेलवे पर आरोप लगाते हुए कहा है, कि रेलवे अपने झूठ को छुपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांग रहा है।
सच्चाई यह है कि रेलवे के पास जमीन से जुड़े दस्तावेज पर्याप्त नहीं हैं, रेलवे द्वारा मनमाने तरीके से सीमांकन कर 78 एकड़ जमीन दिखा दी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में उसके पास कोई भी जवाब नहीं था, इसीलिए उसने आठ सप्ताह का समय मांग लिया, सुमित ने कहा रेलवे सुनवाई के दौरान भूमि से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाया रेलवे की 78 एकड़ जमीन के रेलवे के पास कोई दस्तावेज नहीं है, गौला में पानी के तेज बहाव के कारण रेलवे की जमीन कट गई, जिसमें पटरी स्थानांतरित की गई, ऐसे में जो पूर्व के समय में सीमांकन की गया था वह गलत है।


सुप्रीम कोर्ट में वकीलों ने अच्छी दलील पेश की है। ऐसे में रेलवे ने आठ सप्ताह का समय मांगा है, इससे यह स्पष्ट पता चलता है कि उनके पास जमीन से जुड़े कोई मजबूत सबूत नहीं है।

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