महँगाई की मार ने किया होली का रंग फीका
गुलाल और अनेक तरह की पिचकारियों से गुलज़ार हो चुके बाज़ार
अभी से दिखाई देने लगी होली की रंगत


पिचकारी के दामों में करीब 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी
काशीपुर-(सुनील शर्मा) होली के त्यौहार को अब दो दिन ही शेष बचे हैं। रंगों के पर्व होली के त्यौहार के मद्देनज़र काशीपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में बाजार अबीर गुलाल और अनेक तरह की पिचकारियों से गुलज़ार हो चुके हैं। होली में अभी भले ही दो दिन का समय है पर उसकी रंगत अभी से दिखाई देने लगी है। पिचकारी व रंग-गुलाल की मार्केट गुलजार हो गये है। हालांकि, बीते वर्षों की तुलना में पिचकारी के दामों में करीब 25 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार होली इस बार 17 व 18 मार्च को होने बाला हैं। त्योहार की खुशियां अभी से दिखने लगी है। रंग-गुलाल व पिचकारी की मार्केट सज गये है। शहर के मैंन बाजार नगर निगम रोड, रतन सिनेमा रोड, महाराणा प्रताप चौक समेत अन्य स्थानों पर पिचकारी व रंग-गुलाल की दुकानें पूरी तरह से सज गई हैं। हालांकि, 100 से 200 रुपए तक की पिचकारी लोगों को बहुत पसंद आ रही हैं।
इस बार प्रेसर टैंक, बैग वाली पिचकारी, पब जी, बार्बी वाली, इंडियम आर्मी पिचकारी, मशीनगन, वाटर गन के साथ साथ बच्चों की डोरेमन, पोकेमन, छोटा भीम व गणेशा वाली पिचकारी के साथ साथ अनेक तरह के रंगों के स्प्रे, पिचकारी, कलर बम, कलर चटाई बम्ब, जिओ कलर स्प्रे, मैजिक बलून, कोयल, भूत, बड़ा चश्मा,हाइट, मारवाड़ी टोपी दिखाई दे रही हैं। बच्चों के लिए ख़ास तौर पर निंजा हथौड़ी, मोटू-पतलू वाली पिचकारी बाजारो में है ।
जोकि बाजार में खासी पसंद आ रही है। जहाँ लोग होली के रंगों की खरीददारी में जुटे हैं। तो वहीं लोग केमिकल रंगों से परहेज कर हर्बल गुलाल और खासतौर पर मुर्गाछाप ब्रांड का गुलाल ले रहे हैं। होली के रंगों में संभावित हानिकारक केमिकल्स से त्वचा की समस्याएं होने से स्वास्थ्य को बहुत बड़ा खतरा होता है। इनसे खुजली, लालिमा, सूखापन, स्केलिंग, जलन का एहसास और फुंसियां हो सकती हैं तो वहीं चिकित्सकों के मुताबिक़ केमिकल रंगों के प्रयोग से आँख, नाक और गले में इंफेक्शन आदि शिकायत बनी रहती है।
डॉक्टरों ने इसके लिए केमिकल रंगों से बचने की हिदायत दी है। वहीं दुकानदारों के मुताबिक़ केमिकल रंग सस्ते होने होने के चलते खूब बिक रहे हैं। महँगाई का असर बाजार में साफ़ देखा जा रहा है। बात अगर काशीपुर क्षेत्र की करें तो छोटे से लेकर बड़े दुकानदार खाली बैठने को मज़बूर हैं। रंगों से लेकर बच्चों की पिचकारी और अन्य रंगों के उत्पादों पर खासी महँगाई देखी जा रही है। दुकानदार अनवर की मानें तो इस बार पिछले साल के मुकाबले उत्पादों में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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