हल्द्वानी – उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश रजवार के नेतृत्व में मंगलवार को नैनीताल जिले के विभिन्न स्थानों पर बाल संरक्षण से जुड़े संस्थानों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गफूर बस्ती, रेलवे स्टेशन हल्द्वानी के समीप संचालित एक गैर-सरकारी बाल संस्था में कई अनियमितताएं मिलने का दावा करते हुए आयोग ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
संयुक्त निरीक्षण दल में चाइल्ड हेल्पलाइन नैनीताल, बाल कल्याण समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल तथा पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल रहे। टीम में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल से रेणु अधिकारी और गोविंद, बनभूलपुरा थाने से एसआई ज्योति कोरंगा एवं व्हिलकिश, चाइल्ड हेल्पलाइन की जिला समन्वयक किरण पंत, विधिक सेवा प्राधिकरण से उमा भंडारी, बाल कल्याण समिति से गणेश बिष्ट, केस वर्कर ललित, सरिता, बीना और सूरज मौजूद रहे।


निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि संबंधित संस्था में पांच बालिकाएं और छह बालक मौजूद थे। आयोग के अनुसार, मौके पर मौजूद संस्था की एक कार्मिक ने बताया कि संस्था का संचालन एक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है तथा इसके लिए मिशनरी से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।
दस्तावेज और पंजीकरण नहीं मिलने का दावा
आयोग के अनुसार, निरीक्षण के दौरान संस्था से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। साथ ही प्रारंभिक जांच में संस्था किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं पाई गई। निरीक्षण टीम ने बच्चों के बैठने के स्थान को भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं बताया।
जांच के दौरान यह भी सामने आने का दावा किया गया कि संस्था में आने वाले कुछ बच्चे पहले विद्यालयों में पंजीकृत थे। इस पहलू की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
दो दिन में रिपोर्ट तलब
आयोग के सदस्य योगेश रजवार ने बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन को मामले की जांच कर दो दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। वहीं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को संस्था और उसके संचालन से जुड़े तथ्यों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने जताई गंभीर चिंता
योगेश रजवार ने कहा कि यदि कोई संस्था बिना वैधानिक पंजीकरण के बच्चों से संबंधित गतिविधियों का संचालन कर रही है तो यह गंभीर विषय है और बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसकी गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्था को मिलने वाले वित्तीय सहयोग और उसकी गतिविधियों से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कुछ पहलुओं को संदिग्ध बताते हुए कहा कि जांच के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नैनीताल जनपद में बच्चों से जुड़े गैर-सरकारी संस्थानों का औचक निरीक्षण आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि बाल अधिकारों और सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।

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