जब सपनों की उड़ान गरीबी, समाज की रुढ़िवादिता और कठिनाइयों से टकराती है, तब जन्म लेती है एक ऐसी कहानी जो दिलों को छू जाती है। ऐसी ही एक कहानी अब छोटे पर्दे पर दस्तक देने जा रही है — ‘हिमाचल से ओलंपिक तक’, जो सिर्फ एक धारावाहिक नहीं, बल्कि मां-बेटी के अटूट रिश्ते, संघर्ष और उम्मीदों की गाथा है।
इस प्रेरक धारावाहिक में नैनीताल की होनहार कलाकार नूरी परवीन मुख्य भूमिका में नज़र आएंगी।



कहानी की शुरुआत होती है हिमाचल के एक छोटे से गांव से…
जहां एक सामान्य परिवार आर्थिक तंगी और सामाजिक दबावों से जूझ रहा है। इस परिवार की सबसे बड़ी ताकत है कमला — एक साधारण लेकिन दृढ़ निश्चयी मां, जिसकी दुनिया उसकी बेटी माही है। माही बचपन से ही तैराकी में रूचि रखती है और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती है, लेकिन उसके इस सपने तक पहुंचने की राह में असंख्य बाधाएं हैं — समाज की तंग सोच, सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी, और स्त्री होने का वह बंधन जो आज भी कई घरों में बेटियों के पंख काट देता है।

कमला का किरदार निभा रही हैं नूरी परवीन…..
नैनीताल की चमकती प्रतिभा: नूरी परवीन अली – अभिनय, संघर्ष और सामाजिक बदलाव की प्रेरणा
जब एक कलाकार सिर्फ किरदार नहीं निभाता, बल्कि समाज का आईना बन जाता है, तब वह सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन जाता है। ऐसी ही एक सशक्त शख्सियत हैं नूरी परवीन अली, नैनीताल की बेटी, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और संवेदनशील अभिनय से ना सिर्फ मंच और पर्दे पर अपनी पहचान बनाई है, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर किया है।
एक छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर….
नैनीताल जैसे शांत और सुंदर शहर में पली-बढ़ी नूरी परवीन अली बचपन से ही अभिनय और सामाजिक सरोकारों में रुचि रखती थीं। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। स्कूल और कॉलेज के समय से ही वह नाटक, सांस्कृतिक आयोजनों और मंच प्रस्तुतियों का हिस्सा रहीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी कला को निखारते हुए छोटे-छोटे मंचों से लेकर अब छोटे पर्दे पर एक मज़बूत उपस्थिति दर्ज करवाई है।
‘हिमाचल से ओलंपिक तक’ में दमदार भूमिका…..
हाल ही में नूरी परवीन अली को टेलीविजन धारावाहिक ‘हिमाचल से ओलंपिक तक’ में मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला है। इस धारावाहिक में वह कमला नाम की एक मां का किरदार निभा रही हैं, जो तमाम सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी बेटी को ओलंपिक खिलाड़ी बनाने का सपना संजोती है।
नूरी बताती हैं…..
> “इस धारावाहिक के ज़रिए हम समाज को ये दिखाना चाहते हैं कि बेटियां बोझ नहीं होतीं। अगर एक मां ठान ले, तो वो दुनिया की हर बंदिश तोड़ सकती है।”
सामाजिक संदेश से भरपूर कहानी
‘हिमाचल से ओलंपिक तक’ सिर्फ एक मां-बेटी की प्रेरणादायक यात्रा नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों की कहानी है, जहां बेटियों को आज भी सपने देखने की आज़ादी नहीं दी जाती। यह धारावाहिक समाज को एक आईना दिखाता है कि अगर हिम्मत और विश्वास साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।
इसमें दिखाया गया है कि कैसे माही की मां उसे तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हौसला देती है, खुद कठोर मेहनत करती है, समाज से लड़ती है और बेटी को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जाती है।
सपनों को पंख देती है मां की ममता
कहानी दर्शाती है कि जब एक मां बेटी की ताकत बनती है, तब एक गांव की लड़की भी ओलंपिक के मंच तक पहुंच सकती है। धारावाहिक में उन संवेदनाओं को छुआ गया है, जो हर घर की कहानी हो सकती हैं — एक मां का बलिदान, बेटी की लगन और संघर्षों का एक लंबा सफर।
जल्द ही प्रसारण के लिए तैयार यह धारावाहिक निश्चित ही दर्शकों के दिलों को छूएगा और बेटियों को सपने देखने और उन्हें साकार करने की नई प्रेरणा देगा।
‘हिमाचल से ओलंपिक तक’ — यह सिर्फ एक धारावाहिक नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो कहता है:
“अगर मां का आशीर्वाद हो, तो बेटियां हर मुश्किल पार कर सकती हैं।”

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