आनलाइन बीमा करने के नाम पर लोगों को लगया करोड़ों रुपए का चूना

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रुद्रपुर (एम् सलीम खान) सावधान अगर अपने भी कराया है आनलाइन वाहन बीमा तो हो जाए होशियार (वाहनों के आनलाइन बीमे में बडा फर्जीवाड़ा चार गिरफतार)-(सरकार को लगा चुके हैं चूना, देहरादून एसटीएफ ने की कार्रवाई) देहरादून पैसा कमाने के लिए शातिर दिमाग तरह-तरह के अकड़ने अपनाने से बाज नहीं आ रहें हैं। आनलाइन बीमा करने के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले शातिर गिरोह का एसटीएफ उत्तराखंड ने भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह आम जनता सहित सरकार को भी करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस टी एफ अंजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि चारों एजेंटों देहरादून निवासी प्रदीप गुप्ता, मंसूर हसन और नीरज कुमार के अलावा महमूद निवासी सहारनपुर को गिरफ्तार किया गया है। एसटीएफ के एस एस पी ने बताया कि देहरादून में चौपहिया कामर्शियल वाहन और दूसरे राज्यों से आने वाले बड़े टांसपोर्ट वाहनों का बीमा काफी सस्ते दामों पर करने की जानकारी मिली थी। हैरानी वाली बात यह थी कि आरटीओ की वेबसाइट किसी पोर्टल पर चेक करने पर बीमा कंपनी सही प्रर्दशित होता है। देहरादून आरटीओ की वेबसाइट पर बीमा कंपनी ने कई वाहनों की जानकारी पूरी नहीं डाली थी।जिस पर संदेह हुआ। एसटीएफ ने सस्ता आनलाइन बीमा करने वाले चार एजेंटों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दो साल पहले कई बीमा कंपनियों का एजेंट बनकर अपना पंजीकरण कराया था और उसी पंजीकरण नंबर से बीमा करते थे। बीमा कराने के दौरान चार पहिया वाहन का नंबर वास्तविक दिया जाता था, लेकिन पेमेंट की गणना के समय दोपहिया वाहन का चयन कर उसका बीमा दो पहिया वाहन का कर दिया जाता है। जिसका डाटा बीमा कराने वाली कंपनी के डाटाबेस में चार पहिया का अंकित होता है। लेकिन पेमेंट दो पहिया वाहन का जमा होता है। बीमा के वक्त दी जाने वाली जीएसटी 18 प्रतिशत जहां चार पहिया वाहन की 20.000 पर दी जानी थी। वही दो पहिया वाहन की मात्र 500 रुपए की जमा होती है। आरटीओ की वेबसाइट पर मात्र बीमा होना प्रर्दशित करता था। एजेंट इसका प्रिंट निकाल कर लैपटॉप में फोटोशॉप के जरिए से एडिट करके चार पहिया वाहन व धनराशि को बढ़ा देता है,जिसे वह अपने ग्राहक को देता है। आरोपियों की चोरी इसलिए पकड़ में नहीं आती थी क्योंकि वाहन स्वामी को आरटीओ की वेबसाइट पर वाहन का पंजीकरण नंबर केवल बीमे की वैधता तिथि प्रर्दशित होती है, जिससे ग्राहक को वह असली लगता है। ग्राहक को इस बात की जानकारी नहीं होती कि उसके साथ धोखा किया गया है।

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