उधम सिंह नगर – सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुपालन और राज्य के राजस्व संवर्द्धन के प्रयासों के तहत राज्य कर विभाग की उधम सिंह नगर की तीन प्रमुख सचल दल इकाइयों—किच्छा, रुद्रपुर और काशीपुर—ने अपने प्रवर्तन कार्यों के माध्यम से अपवंचनकारी तत्वों पर काफी हद तक प्रभावी अंकुश लगाने में सफलता प्राप्त की है। नए वित्तीय वर्ष के प्रथम माह अप्रैल में तीनों इकाइयों द्वारा सभी प्रकार के माल का परिवहन करने वाले वाहनों की सघन जांच और निगरानी की गई।
आमतौर पर जनमानस में यह धारणा बनी हुई है कि केवल पान मसाला, सिगरेट और बीड़ी जैसी वस्तुओं में ही अपवंचन होता है, लेकिन इस भ्रांति को दूर करने के लिए सचल दल इकाइयों ने रणनीति के तहत प्रदेश के बाहर से आने वाली पान मसाला की गाड़ियों के परिवहन मार्गों पर विशेष निगरानी रखते हुए उन्हें रोका और विस्तृत भौतिक सत्यापन की कार्रवाई की। इसके साथ ही परचून का कार्य करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनियों के अधिकाधिक वाहनों को भी जांच के लिए रोका गया।


रुद्रपुर इकाई द्वारा अप्रैल माह में बिना वैध प्रपत्रों के माल परिवहन करने वाली परचून गाड़ियों पर नियमानुसार 21.87 लाख रुपये जमा कराए गए। वर्तमान स्थिति यह है कि तथाकथित ‘कच्चे’ का कार्य करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनियों में भय का माहौल है और पान मसाला के व्यापारी घोषित मात्रा से अधिक माल लोड करने से बच रहे हैं। किच्छा मोबाइल यूनिट की सख्ती का परिणाम यह भी सामने आया है कि बरेली की ट्रांसपोर्ट कंपनियां अब बिना वैध प्रपत्रों के माल बुक करने से परहेज कर रही हैं।
उत्तर भारत के अन्य राज्यों की प्रवर्तन इकाइयों की तुलना में उत्तराखंड की प्रवर्तन इकाइयों द्वारा अपवंचन में लिप्त व्यापारियों पर नियमानुसार धारा 130 के अंतर्गत जुर्माना आरोपित किया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली में सुधार हो और अपवंचन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। लगातार की जा रही सघन जांच के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं।

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