पैंया/चमोली – शून्य छात्र संख्या के चलते राजकीय प्राथमिक विद्यालय पैंया को बंद कर दिया गया है। कभी बच्चों की चहल-पहल और किलकारियों से गूंजने वाला यह विद्यालय अब सन्नाटे में डूब गया है। इस निर्णय के बाद पूरे गांव में गहरा भावनात्मक माहौल देखने को मिला है।
बृहस्पतिवार को शिक्षा विभाग की टीम ने ग्राम प्रधान रजनी देवी की उपस्थिति में विद्यालय की सभी सामग्री समेटकर अन्य विद्यालय में स्थानांतरित कर दी। कुर्सी, मेज, ब्लैकबोर्ड, खेल सामग्री, चटाई, दरी तथा मध्याह्न भोजन के बर्तन वाहन के माध्यम से राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंजाखेत भेजे गए, जहां वर्तमान में 15 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।


विद्यालय के बंद होने से न केवल शैक्षणिक गतिविधियां समाप्त हुईं, बल्कि गांव की सामाजिक और भावनात्मक पहचान को भी गहरा आघात पहुंचा है। यह विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की यादों और संस्कारों का सजीव प्रतीक रहा है।
पुरातन छात्र हुए भावुक
विद्यालय के सामान को ले जाते समय गांव के पूर्व छात्र अनिल कपरूवान, मनोज कपरूवान और विजय भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि जिन दरियों पर बैठकर उन्होंने अक्षर ज्ञान प्राप्त किया था, उन्हीं को जाते देख ऐसा महसूस हुआ जैसे उनका बचपन भी साथ चला गया हो।
खंड शिक्षा अधिकारी केएस टोलिया ने बताया कि शून्य छात्र संख्या के कारण विद्यालय को बंद करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सभी संसाधनों को बिंजाखेत विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां उनका उपयोग वहां पढ़ने वाले बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संसाधन-संचालित बनाने की दिशा में लिया गया है। हालांकि, इस फैसले ने ग्रामीणों के दिलों में गहरी भावनात्मक छाप छोड़ दी है।

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