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कुमाऊँ की नारियों, लोकसंस्कृति और देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी से भड़का जनआक्रोश…

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हल्द्वानी – कुमाऊँ की महिलाओं, लोकसंस्कृति और देवी-देवताओं को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में अब विरोध सिर्फ सामाजिक स्तर तक सीमित नहीं रहा। मामले को लेकर पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें बयानबाज़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक भावनाओं, देवी-देवताओं एवं महिलाओं की गरिमा का घोर अपमान बताया गया है।

शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संबंधित महिला द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित वीडियो/बयानों में उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति, देवी-देवताओं तथा कुमाऊँ की महिलाओं के विरुद्ध अपमानजनक, अमर्यादित एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। शिकायत के अनुसार यह बयान जानबूझकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, महिलाओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने की श्रेणी में आता है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुमाऊँ की महिलाएं नारी शक्ति, संस्कार और परंपरा की प्रतीक हैं और कौतिकों व लोकपर्वों में उनका नृत्य-संगीत उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे आयोजनों और उनमें भाग लेने वाली महिलाओं को नीचा दिखाना पूरे राज्य और समाज का अपमान है।

FIR में यह आरोप भी दर्ज है कि देवी-देवताओं और लोकआस्थाओं को लेकर की गई टिप्पणियां उत्तराखंड की धार्मिक मान्यताओं पर सीधा प्रहार हैं, जिससे आम जनता में आक्रोश फैलना स्वाभाविक है। शिकायतकर्ता ने इसे कानून-व्यवस्था एवं सामाजिक शांति के लिए घातक बताया है।

सांस्कृतिक संगठनों, महिला समूहों और सामाजिक संस्थाओं ने शिकायत का हवाला देते हुए मांग की है कि इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में किसी भी व्यक्ति को कुमाऊँ की संस्कृति, नारियों और देवआस्थाओं का अपमान करने की छूट न दी जाए

समाज का साफ कहना है कि कुमाऊँ की पहचान शालीनता, सम्मान और आस्था से है। अब ऐसे बयानों का जवाब सिर्फ विरोध से नहीं, बल्कि कानून के दायरे में दिया जाएगा।

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