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दशहरा विशेष- करुणाकी मूर्ति और करुणाराम की महिमा अपरम्पार है…..

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मंगल भवन अमंगल हारी,

द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी,

राम सिया राम, सिया राम,

जय जय राम…

जय श्री राम  शब्द ऊर्जा से परि पूर्ण  है तेज से परिपूर्ण उत्साह भरने का काम  करता है ।

इसीलिए कहा गया है लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।

कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।

नैनीताल- सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर तथा रणक्रीडा में धीर, कमलनेत्र, रघुवंश नायक, करुणाकी मूर्ति और करुणाराम की महिमा अपरम्पार है। श्री राम का जन्म 5114 ईशा पूर्व  चैत्र मास की राम नवमी माना जाता है जिन्होंने असत्य पर सत्य की विजय अधर्म पर धर्म की विजय ,अहंकार का अंत किया ऐसे प्रभु राम का नाम बहुत  ही महत्पूर्ण है । राम  ने खुद  ही कहा कि राम से बड़ा राम का नाम।  जीवन का आधार ही राम नाम है । राम सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि  सबसे बड़ा मन्त्र है। राम नाम की महिमा ही है की  भगवान शिव  भी राम नाम जपते हैं। संसार चल ही राम नाम से रहा है।

 

सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, वायु की  सभी शक्ति  राम नाम ही  समाहित है। वाल्मीकि रामायण में श्रीराम के  सोलह गुण बताए गए हैं, जो लोगों में नेतृत्व क्षमता बढ़ाने व किसी भी क्षेत्र में अगुवाई करने के अहम सूत्र हैं।  गुणवान ,सकारात्मक ,धर्मज्ञ , कृतज्ञ, सत्यनिस्ठ ईमानदार,दृढ़ प्रतिज्ञ, सदाचारी,  मददगार,विद्वान बुद्धिमान  विवेक शील ,सामथ्र्यशाली ,प्रियदर्शन ,धैर्यवान  व्यसन  मुक्त ,क्रोध जीतने वाला शांत सहज , कांतिमान व्यक्तित्व , वीर्यवान  स्वस्थ , संयमी हष्ट-पुष्ट ,युद्ध में जागरूक जोशीला है राम नाम में आपार शक्ति है।

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इसमें तीन अक्षर है- र,आ तथा म। ‘र’ अग्नि का बीज है, ‘आ’ सूर्य का बीज है तथा ‘म’ चन्द्रमा का बीज है। अग्नि, सूर्य तथा चन्द्रमा सृष्टि का आधार हैं। ये सब समाहित  है राम में ।राम’  बोलने से  शरीर और मन में  आनंद की प्रतिक्रिया होती है जो  आत्मिक शांति देती है। हिन्दू धर्म के चार आधार स्तंभों में से एक है श्रीराम। भगवान श्री राम ने एक आदर्श चरित्र प्रस्तुत कर समाज को एक सूत्र में बांधा था। भारतीय संस्कृति  की आत्मा है प्रभु श्रीराम। राम नाम  का वर्णन कई ग्रंथ में है  वाल्मीकि कृत रामायण जो  मूल संस्कृत में लिखा गया  है किंतु  तमिल भाषा में कम्बन रामायण, असम में असमी रामायण, उड़िया में विलंका रामायण, कन्नड़ में पंप रामायण, कश्मीर में कश्मीरी रामायण, बंगाली में रामायण पांचाली, मराठी में भावार्थ रामायण आदि भारतीय भाषाओं में प्राचीनकाल में ही रामायण लिखी गई।

 

गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधि भाषा में रामचरित मानस लिखी विदेशों में कंपूचिया की रामकेर्ति या रिआमकेर रामायण, लाओस फ्रलक-फ्रलाम (रामजातक), मलयेशिया की हिकायत सेरीराम, थाईलैंड की रामकियेन और नेपाल में भानुभक्त कृत रामायण प्रसिद्ध है।  कबीर ने राम की परिभाषा  कर कहा की आदि राम अविनाशी परमात्मा है जो सब का सृजनहार व पालनहार है।राम का अर्थ है ‘प्रकाश’। किरण एवं आभा (कांति) जैसे शब्दों के मूल में राम है। ‘रा’ का अर्थ है आभा और ‘म’ का अर्थ है मैं; मेरा और मैं स्वयं। राम का अर्थ है मेरे भीतर प्रकाश, मेरे ह्रदय का  प्रकाश। निश्चय ही ‘राम’ ईश्वर का नाम है,

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जो इस धरती पर 7560 ईसा पूर्व अर्थात 9500 वर्ष पूर्व अवतरित हुए थे। राम शब्द संस्कृत के दो धातुओं, रम् और घम से बना है। रम् का अर्थ है रमना या निहित होना और घम का अर्थ है ब्रह्मांड का खाली स्थान। इस प्रकार राम का अर्थ सकल ब्रह्मांड में निहित या रमा हुआ तत्व यानी चराचर में विराजमान स्वयं ब्रह्म। शास्त्रों में लिखा है, “रमन्ते योगिनः अस्मिन सा रामं उच्यते” अर्थात, योगी ध्यान में जिस शून्य में रमते हैं उसे राम कहते है । अभिवादन में राम-राम’ शब्द बोला  जाता है जो  हमेशा 2 बार बोला जाता है।

 

वैदिक दृष्टिकोण के अनुसार पूर्ण ब्रह्म का मात्रिक गुणांक 108 है। वह राम-राम शब्द दो बार कहने से पूरा हो जाता है,क्योंकि हिंदी वर्णमाला में ”र” 27वां अक्षर है।’आ’ की मात्रा दूसरा अक्षर और ‘म’ 25वां अक्षर, इसलिए सब मिलाकर जो योग बनता है वो है 27 + 2 + 25 = 54, अर्थात एक “राम” का योग 54 हुआ। और दो बार राम राम कहने से 108 हो जाता है जो पूर्ण ब्रह्म का द्योतक है।  लेकिन सिर्फ “राम-राम” कह देने से ही पूरी माला  108 का जाप हो जाता है।

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और 108  को सूर्य की कलाओं का प्रतीक माना जाता है।

‘राम’ शब्द के संदर्भ में स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा:

करऊँ कहा लगि नाम बड़ाई।

राम न सकहि नाम गुण गाई स्वयं राम भी ‘राम’ शब्द की व्याख्या नहीं कर सकते,ऐसा राम नाम है। ‘राम’ विश्व संस्कृति के अप्रतिम नायक है। वे सभी सद्गुणों से युक्त है। वे मानवीय मर्यादाओं के पालक और संवाहक है। समस्त आदर्शों के स्वामी है ।जिस साधक ने अपनी मन  इंद्रियों को वस में करके , राम + चरित+ मानस( अर्थात राम के वे चरित जो मन में है  राम कौन ,

 

रमनते योगीनह स रामह( अर्थात योगी जिसमें रमण करते है वही राम है.  वैसे तो भगवान राम से कई  अन्य नाम  भी है  जिनमें श्री राम ,भगवान राम ,रामचंद्र ,रघुवर ,रघुनाथ ,दशरथी ,राघव ,,रघुनंदन , रमण,रामराज ,राम किशोर ,रामिल ,रमेश ,राम देव ,रामदास ,रामचरण ,रामानंद ,रामोजी ,सीता बल्लभ ,कौशल्या नंदन , भी है श्री राम कण  कण में है वो ब्रह्मांड का आनंद है ।इसलिए जय श्री राम  और आपको राम राम

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