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सावन कृपाल रूहानी मिशन द्वारा मानव केंद्र में आयोजित की गयी सत्संग प्रवचन…..

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देहरादून- सावन कृपाल रूहानी मिशन द्वारा मानव केंद्र में आयोजित आध्यात्मिक सत्संग प्रवचन की शुरुआत  माता रीटा जी द्वारा गुरु अर्जुन देव जी की रब्बी वाणी से गाए गए ”झिम झिम बरसै अमृतधारा“ (धीरे-धीरे, बूंद-बूंद करके अमृत की धारा हमारे भीतर बहती है।) शब्द से हुई। उसके पश्चात संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने अपनी दिव्यवाणी में समझाया कि आनंद और सदा-सदा की खुशी को हम ध्यान-अभ्यास के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने मानव केन्द्र में हजारों की संख्या में एकत्रित भाई-बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि हम सब खुश और आनंदित रहना चाहते हैं। हालांकि हम जीवन की बाहरी गतिविधियों में खुशी को तलाशते हैं और इस बात से अनजान रहते हैं कि असली खज़ाना हमारे भीतर छुपा हुआ है।

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हमारा मन हमें यह विश्वास दिलाता है कि भ्रम की बाहरी दुनिया वास्तविक है लेकिन यह हमें सच्चाई से दूर रखती है। हम सभी आत्माएं पिता-परमेश्वर के प्रेम और प्रकाश से भरी हुईं हैं। हमारा वास्तविक सार प्रभु का दिव्य-प्रेम और सौंदर्य है। हम सब अपने भीतर प्रभु के इस प्रेम और प्रकाश से जुड़कर सदा-सदा का आनंद पा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हममें से प्रत्येक के अंदर प्रेम,

 

शांति और आनंद के दिव्य खज़ाने छुपे हुए हैं। जब हम एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु से दीक्षा प्राप्त करके नियमित रूप से ध्यान-अभ्यास करते हैं तो हमारे भीतर शांति और आनंद का ़द्वार खुल जाता है और हमारा मन शांत हो जाता है। पिता-परमेश्वर के नाम का मधुर अमृत हमारी आत्मा के रोम-रोम में समा जाता है। जिससे कि हम अपने भीतर सदा-सदा का आनंद और शांति का अनुभव करते हैं। जिसका प्रभाव सिर्फ उस समय तक ही नहीं बल्कि लंबे समय तक हमारे साथ रहता है। उन्होंने कहा कि जब हम अपने भीतर शांति और आनंद का अनुभव करते हैं तो हमसे यह शांति दूसरों तक भी जाती है।

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जिससे कि हमारे आस-पास के सभी लोगों में खुशी और शांति फैलती है और वे भी शांत होना शुरू हो जाते हैं। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने सभी से ध्यान-अभ्यास में ज्यादा से ज्यादा समय देने और आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से पिता-परमेश्वर की याद करने पर जोर दिया। जिससे कि हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य प्रभु-प्राप्ति इसी जीवन में पूरा हो सके। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के सत्संग कार्यक्रम में सिर्फ देहरादून से ही नहीं बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों के हजारों लोगों के अलावा विदेशों से आए भाई-बहनों ने भी भाग लिया।

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यह संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की देहरादून में सातवीं यात्रा है, जिसका पूरी संगत को बेताबी से इंतजार था। उनके दिव्य-दर्शन और आत्मा को उभारने वाले सत्संग ने सारे वातावरण को प्रभु-प्रेम और दिव्यता के गहरे रंग में रंग दिया। जिसके द्वारा सभी ने अपने अंदर आध्यात्मिक उभार को अनुभव किया। संत राजिन्दर सिंह जी महाराज गैर-लाभकारी संगठन सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख हैं, जिसे पूरे विश्व में आध्यात्मिक विज्ञान के रूप में भी जाना जाता है।

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