उत्तराखण्ड ज़रा हटके रुद्रपुर

प्रशासन एवं सरकार की मिली भगत से सैकड़ो करोड़ की जमीन मात्र 3 लाख 10 हजाररुपए में कर दी गई फ्री होल्ड…..

ख़बर शेयर करें -

रुद्रपुर- मछली पालन के लिये ऑप्शन पर दी गयी अरबों रुपयों की 4.07 एकड़ सरकारी नजूल भूमि को भ्रष्ट अधिकारीयों और कर्मचारियों ने करोड़ों के बारे न्यारे कर वास्तविक तथ्यों  को छुपाते हुये इस भूमि को मात्र 3 लाख 10 हजार मे लीज धारकों के पक्ष में कर दी फ्री होल्ड :- शिकायत के बाद हुई कार्यवाही की आर.टी.आई में ली गयी सूचनाओं से हुआ खुलासा उक्त क्रम में अवगत करना है

 

की नगर निगम रुद्रपुर क्षेत्र अंतर्गत स्थित मोहल्ला शिवनगर/संजय नगर के मध्य वार्ड नं0- 2 (रोडवेज के समीप किच्छा बाईपास मार्ग पर ) राजस्व ग्रा0. लमरा एवं रम्पुरा के खसरा संख्या- 2 एवं 156 के मध्य स्थित नजूल भूखण्ड संख्या – 1 पैमाईश 150×110 मीटर अर्थात 4-07 एकड़ नजूल भूमि को मछली पालन हेतु दिनांक 7-12-1988 को सार्वजनिक नीलामी के दौरान विनीत बत्रा पुत्र श्री हरी चन्द्र,श्रीमती रामप्यारी पत्नी इकबाल चन्द्र,महेन्द्र छाबड़ा पुत्र श्री चरनदास छाबड़ा, किशोर कुमार पुत्र श्री सन्तलाल, राजेश कुमार पुत्र श्री रामलाल निवासी रुद्रपुर द्वारा मु0- 3.07.000.00/-[तीन लाख सात हजार] रुपयों की सर्वोच्च बोली लगाई गई थी

 

इसमें से ¼ धनराशि 76,750/- (छियत्तर हजार सात सौ पचास) रूपये नगर पालिका परिषद रुद्रपुर द्वारा रसीद संख्या-125/95 दिनांक 7/12/1988 में जमा किये जाने पर नीलामी स्वीकृति हेतु प्रकरण  शासन, को प्रेषित हुआ था! प्रश्नगत प्रकरण में उक्त बोली दाताओं द्वारा अरबों रूपयों की सरकारी नजूल भूमि को शासन स्तर के  अधिकारियों को करोड़ों रुपयों की रिश्वत देकर मच्छली पालन की स्वीकृति ना कराकर राजाज्ञा संख्या-2301/V-आ0-05-10 [एन0ए0]/2005 दिनांक 30-10-2006 द्वारा प्रश्नगत प्रकरण में सम्बंधित बोली दाताओं से नीलामी की धनराशि के ¾ भाग पर कब्जा प्राप्त करने की तिथि दिनांक 07-12- 1988 से अवशेष धनराशि जमा करने की तिथि तक 15% वार्षिक ब्याज सहित जमा कराते हुए दिनांक 09- 11-2000 के सर्किल रेट पर फ्री होल्ड किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी इस कथन का उल्लेख प्रपत्र-क (पट्टागत नजूल भूमि के विलेख के पृष्ठ संख्या- 2 व 3 पर अंकित किया गया है!

 

किसी भी सार्वजनिक नीलामी में कई बोली दाताओं द्वारा प्रतिभाग किये जाने के पश्चात प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग बोली लगाई जाती है परन्तु इस मामले में उक्त पाँचो व्यक्तियों द्वारा सर्वोच्च बोली लगाने का कथन लिखित रूप से पृष्ठ संख्या 2 व 3 में अंकित किया गया है जो कि सरासर नियम विरुद्ध है, दूसरा महत्वपूर्ण बिन्दु यह भी है कि किसी भी नीलामी की सम्पूर्ण धनराशि जमा करवाने के पश्चात ही सर्वोच्च वोली दाता को प्रश्नगत कार्य करने हेतु कब्जा दिया जाता है जबकि इस मामले में 7/12/1988 को नीलामी की तिथि पर ही उक्त व्यक्तियों को कब्जा प्राप्त करवा दिया गया जिसकी पुष्टि पृष्ठ संख्या 3 पर अंकित किये गये कथन से होती है इसके अतिरिक्त इसी विषय पर दिनांक 7/12/1988 को मछली पालन की नीलामी के पश्चात 24 वर्ष अर्थात 2006 तक अरबों रुपयों की सरकारी मछली पालन की नजूल भूमि पर करोड़ों रुपयों की रिश्वत प्राप्त कर शासन से मछली पालन की स्वीकृति प्राप्त ना होने का शणयान्त्र रचकर मछली पालन की स्वीकृति के स्थान पर शासन से फ्री होल्ड की स्वीकृति प्राप्त कर ली गयी!

यह भी पढ़ें 👉  श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने आयोजित की गोष्ठी, समस्याओं पर हुई चर्चा...

 

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि तत्कालीन नगर पालिका परिषद रुद्रपुर के अधिकारियों/कर्मचारियों तथा सर्वोच्च बोली दाताओं द्वारा आपस मे हम साज हो कर इस अरबों रुपयों की नजूल भूमि को मछली पालन की स्वीकृति के स्थान पर नियम विरुद्ध फ्री होल्ड किया जाना स्पष्ट प्रमाणित होता है! प्रार्थी द्वारा जिलाधिकारी महोदय सहित शासन के अन्य संम्बंधित उच्च अधिकारियों को दिनांक 28/04/ 2023 व 15/05/2023 को शिकायती प्रार्थना पत्र प्रेषित किया गया था (जिसकी छायाप्रति संलग्न है) प्रार्थी के अतिरिक्त श्री अमित नारंग द्वारा भी वर्ष 2017-18 में प्रश्नगत मामले की शिकायत की गयी थी तथा शासन के पत्र संख्या-74/V-1/2018-07(एन0एल0)/2018 दिनांक 15 फ़रवरी 2018 को मामले की जॉच कर अवगत करवाने के क्रम में जिलाधिकारी उधम सिंह नगर द्वारा संयुक्त सचिव, उत्तराखंड शासन,

 

आवास अनुभाग-1 देहरादून को पत्र संख्या 10426/एस0टी0(नजूल)/(विविध -02)2023 दिनांक 17 जून 2023 भेजा गया है जिस के साथ अपर जिलाधिकारी (न0/प्र0) उधम सिंह नगर द्वारा की गयी जॉच आख्या सख्या- 9711/एस0 टी0 (नजूल )/(विविध -02)2022 दिनांक 29/05/2023 को जिलाधिकारी महोदय के पत्र के साथ संलग्न कर प्रेषित की गयी है! आवेदक छाबड़ा आदि द्वारा फ्री होल्ड विलेख में राजस्व ग्रा0 लमरा एवं रम्पुरा के क्रमश खसरा संख्या-2 व 156 पर कटिंग कर बाद में राजस्व ग्राम लमरा के खसरा संख्या-2 को विलोपित कर दिया गया है तथा किसी भी खसरा संख्या में प्रथक प्रथक रकवे का उल्लेख नहीं किया गया है मूल बिलेख में ग्राम लमरा एवं खसरा संख्या 2 को काट कर ग्रा0 रम्पुर के खसरा संख्या 156 लिखे जाने का कोई कारण/ स्वीकृति पत्रावली में उपलब्ध नहीं है

यह भी पढ़ें 👉  सतपुली महाविद्यालय में समर्थ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के संबंध में की जन जागरूकता बैठक......

 

जबकि दोनों ग्राम अलग-अलग है और पंजीकृत बैनामे के लगभग 9 वर्ष पश्चात दिनांक 11/5 /2016 को नगर निगम रुद्रपुर द्वारा प्रस्तुत की गई आख्या भी सन्देहास्पद प्रतीत होना, जांच आख्या में अपर जिलाधिकारी (न0/प0) महोदय द्वारा स्पष्ट किया गया है यह बिंदु संख्या-10 के रूप मे अपर जिलाधिकारी महोदय/जांच अधिकारी द्वारा जांच आख्या दिनांक 29/5/2023 के बिन्दु संख्या-11 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शासनादेश में स्वीकृत ग्रा0 लमरा के खसरा संख्या -2 को फ्री होल्ड ना कर  ग्राम रम्पुरा का खसरा संख्या 156 को फ्री होल्ड किया जाना एवं कटिंग किये गये पृष्ठ पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर ना होना तथा इस परिवर्तन के सम्बंध में कोई शासना आदेश पत्रावली में ना होना इस प्रकरण को सन्देह पूर्ण बनाता है! अपर जिलाधिकारी (न0/प0) जांच अधिकारी द्वारा जिलाधिकारी को भेजी गयी अपनी जांच आख्या सख्या-9711/एस0डी0(नजूल)/विविध-2/2022 दिनांक 29/5/2023 के बिन्दु संख्या-12 में स्पष्ट किया गया है!

 

की उपरोक्त तत्थो से ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदक द्वारा तथ्यों को छुपा कर प्रश्नगत भूखंड को फ्री होल्ड करवाया गया है तथा अनाधिकृत व्यक्तियों के माध्यम से फ्री होल्ड के बिलेख पर राजस्व ग्राम लमरा विलोपित कर राजस्व ग्राम राम्पुरा अंकित करवा लिया गया है! `तथा वर्तमान में सहायक नगर आयुक्त नगर निगम रुद्रपुर का यह कथन किया जाना कि सम्बंधित पत्रावली नगर निगम कार्यालय में प्राप्त नहीं हो रही है प्रकरण की संदेहात्मकता को बनता है! क्योंकि इनके द्वारा वास्तविक तथ्यों  को छुपाने के लिये सम्बंधित पत्रावलियां गायब करवा दी गई है जिसकी पुष्टि डीम्ड लोक सूचना अधिकारी /कर निरीक्षक नगर निगम रुद्रपुर के पत्र सं0-1240 /सू0अ0अधि0/2022-23,दिनांक 13/4/2023 के साथ संलग्न मानचित्रकार नगर निगम रुद्रपुर उधर सिंह नगर के दिनांक रहित लोक सूचना अधिकारी नगर निगम रुद्रपुर द्वारा प्रस्तुत कि गयी आख्या से प्रणामि होता है

यह भी पढ़ें 👉  रूद्रपुर में अमृत योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन फीकल स्लज एवं ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) का निर्माण की समीक्षा बैठक……

 

जिस कि छाया प्रति संलग्न है! जिलाधिकारी उधम सिंह नगर द्वारा संयुक्त सचिव, उत्तराखंड शासन, आवास अनुभाग-1 देहरादून को प्रेषित पत्र संख्या 10426/एस0टी0(नजूल)/(विविध -02)2023 दिनांक 17 जून 2023 पर की गयी अग्रिम कार्यवाही के सम्बन्ध में प्रार्थी द्वारा RTI के तहत मांगी गयी सूचना के क्रम में आवास अनुभाव -1 सख्या -507/V-1/2023-27(सू अधि)/2023 दिनांक 20 दिसम्बर 2023 के साथ संलग्न श्री अतर सिंह, अपर सचिव, उत्तराखंड देहरादून के पत्र सं0- 142727 दिनांक 01अगस्त 2023 के द्वारा प्रेषित पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है की उक्त प्रकरण में जिलाधिकारी महोदय को विस्तृत परीक्षण एवं जांच उपरांत आवश्यक कार्यवाही किये जाने के संम्बंध में निर्देशित किया गया है ! इसके क्रम में जिलाधिकारी महोदय उधम सिंह नगर से की गयी कार्यवाही के सम्बन्ध मे मांगी गयी सूचना के क्रम में कार्यालय लोक सूचना अधिकारी/ जिलाधिकारी,

 

उधम सिंह नगर के पत्र संख्या- 4077 दिनांक 05/01/2024 के साथ संलग्न अपर जिलाधिकारी (न0/प0) के पत्र संख्या- 2722 दिनांक 21 दिसंबर 2023 जो उपाध्यक्ष जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण उधम सिंह नगर एवं प्रतिलिपि उप निबंधक रुद्रपुर को संदर्भित किया गया है कि उपरोक्त भूमि से सम्बन्धित मानचित्र तथा ले-आउट स्वीकृती की प्रक्रिया स्थगित कर दी गयी है! उच्च स्तरीय जांच में निकले निष्कर्ष के आधार पर अपर सचिव, उत्तराखंड शासन के पत्र -142727/-V-1/E-57132/2023 दिनांक 01/अगस्त,2023 के विन्दु सं0- 10,11,12,13, के क्रम मे उक्त आवेदको एवं नगर निगम रुद्रपुर के सम्बंधित अधिकारियो /कर्मचारियों जिन के द्वारा पत्रावली गायव करवाई गयी है के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करते हुये दोषियों को दंडित करने एवं अरबो रुपयों की सरकारी नजूल भूमि के पट्टाबिलेख दिनांक 07/12/1988 को निरस्त कर सरकारी भूमि को प्रशासन की सुपुर्दगीं में लिया जाना अति आवश्यक है

Leave a Reply