
रुद्रपुर – स्थित नेशनल हाईवे 74 पर ओवरलोड ट्रक और डंपर बेधड़क दौड़ रहे हैं, जो न केवल यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं बल्कि सड़क पर चलने वाले राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग की उदासीनता के कारण यह समस्या गंभीर होती जा रही है।
सड़कों पर बेखौफ दौड़ते ओवरलोड वाहन
रुद्रपुर के एनएच-74, काशीपुर रोड पर हर दिन बिना नंबर प्लेट, बिना इंडिकेटर लाइट और बिना मड-फ्लैप के भारी-भरकम ओवरलोड डंपर तेज रफ्तार से दौड़ते देखे जा सकते हैं। इन वाहनों से उड़ती धूल और बालू न केवल प्रदूषण फैला रहे हैं, बल्कि छोटे वाहनों और दोपहिया चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। कई बार ये ओवरलोड वाहन बड़े हादसों का कारण बन चुके हैं, लेकिन प्रशासन और परिवहन विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा
ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग आए दिन बाइक और फोर व्हीलर चालकों पर सख्ती दिखाते नजर आते हैं, लेकिन जब बात ओवरलोड डंपरों की आती है, तो वे चुप्पी साध लेते हैं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण ये वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है।
परिवहन अधिकारी की प्रतिक्रिया
जब इस विषय में रुद्रपुर के परिवहन अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जिन वाहनों ने अब तक रजिस्ट्रेशन प्लेट नहीं लगवाई है, उन पर भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय जनता में आक्रोश
रुद्रपुर और काशीपुर रोड के स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों की मांग है कि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई हो, अन्यथा किसी बड़े हादसे की पूरी संभावना बनी हुई है।
क्या होने चाहिए समाधान?
- प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे और ओवरलोड वाहनों पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी।
- चेकिंग प्वाइंट्स की संख्या बढ़ाई जाए और हर मुख्य मार्ग पर ओवरलोडिंग की जांच हो।
- बिना नंबर प्लेट और बिना इंडिकेटर लाइट के वाहनों पर तत्काल जुर्माना लगाया जाए।
- स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन मिलकर प्रशासन पर दबाव बनाएं ताकि सख्त कार्रवाई हो।
- सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए।
ओवरलोड वाहनों की बढ़ती संख्या न केवल सड़कों को असुरक्षित बना रही है, बल्कि यह नियमों की अवहेलना और प्रशासनिक लापरवाही का भी बड़ा उदाहरण है। अगर समय रहते इन पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या आने वाले समय में और भी गंभीर हो सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर कब जागता है और कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।

