
रमज़ान 2025: तारीख, महत्व, इबादतें और खास बातें
हल्द्वानी:- रमज़ान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना है, जिसमें रोज़े (उपवास), इबादत और नेकी के कामों की अहमियत सबसे ज्यादा होती है। इस साल रमज़ान 2025 की शुरुआत और उससे जुड़ी सभी अहम जानकारियां यहां दी जा रही हैं।
रमज़ान का महत्व और इसकी फज़ीलत
रमज़ान इस्लाम में सबसे ज्यादा मुकद्दस महीना माना जाता है। इस महीने में कुरआन-ए-पाक का नुज़ूल (अवतरित होना) हुआ था। यह महीना खुदा की इबादत, गुनाहों से तौबा और नेकियों में इज़ाफा करने का मौका देता है।
रसूल-ए-पाक (ﷺ) ने फरमाया:
“रमज़ान में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शैतान को कैद कर दिया जाता है।” (सहीह बुखारी)
इस महीने में हर नेक अमल का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है और अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को कुबूल करता है।
रोज़े (उपवास) और उनके नियम
रमज़ान में रोज़ा रखना हर मुसलमान पर फर्ज़ होता है (सिवाय बीमार, बुजुर्ग, सफर में रहने वाले, गर्भवती और बच्चों के)। रोज़े के दौरान सुबह सहरी (सुब्ह सादिक से पहले का भोजन) किया जाता है और शाम को इफ्तार (सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोलना) किया जाता है।
रोज़े के दौरान मना की गई चीज़ें:
खाने-पीने से परहेज
ग़लत बात, झगड़ा और बुरी आदतें
झूठ बोलना और ग़ीबत करना
दिन में जानबूझकर रोज़ा तोड़ना (बिना किसी सही वजह के)
रोज़े के फायदे:
आत्म-संयम और सब्र की आदत
गरीबों और जरूरतमंदों की तकलीफों को महसूस करना
सेहत के लिए फायदेमंद (विज्ञान भी उपवास को डिटॉक्सिफिकेशन के लिए अच्छा मानता है)
रमज़ान की खास इबादतें और दुआएं
तरावीह की नमाज: रमज़ान में हर रात इशा की नमाज के बाद तरावीह पढ़ी जाती है, जिसमें कुरआन की तिलावत की जाती है।
लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र): रमज़ान की आखिरी 10 रातों में से एक खास रात होती है, जिसमें की गई इबादत का सवाब 1000 महीनों (83 साल) की इबादत से भी ज्यादा होता है।
ज़कात और सदक़ा: रमज़ान में जकात देना जरूरी होता है, ताकि जरूरतमंदों की मदद हो सके।
इफ्तार और सहरी की दुआ:
सहरी की दुआ:
“वबिसौमि ग़दन नवैतु मिन शहरि रमज़ान” (मैंने रमज़ान के रोज़े की नीयत की)
इफ्तार की दुआ:
“अल्लाहुम्मा लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अला रिज़्क़िका अफ्तर्तु” (हे अल्लाह, मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तेरी दी हुई रोज़ी से रोज़ा खोला)
ईद-उल-फितर 2025
रमज़ान के खत्म होते ही ईद-उल-फितर मनाई जाती है। यह खुशी और अल्लाह का शुक्र अदा करने का दिन होता है। ईद से पहले फित्रा (दान) देना जरूरी होता है, ताकि गरीब लोग भी ईद मना सकें।
📌 फ़ित्रा की मिक़दार कैसे तय होती है?
फ़ित्रा की मिक़दार शरई तौर पर आटा, जौ, खजूर या किशमिश की क़ीमत के हिसाब से दी जाती है।
📌 हदीस शरीफ़ के मुताबिक़, फ़ित्रा साढ़े तीन (3.5) किलो गेहूं या उसकी क़ीमत के बराबर होता है। अगर कोई जौ, खजूर या किशमिश से देना चाहे तो उसकी क़ीमत के मुताबिक़ अदा कर सकता है।
📌 फ़ित्रा अदा करने का सही वक़्त
☑ ईद की नमाज़ से पहले फ़ित्रा अदा कर देना चाहिए।
☑ बेहतर है कि रमज़ान के आख़िरी अशरे (10 दिनों) में अदा कर दिया जाए, ताकि ग़रीब लोग ईद की तैयारियाँ कर सकें।
📌 फ़ित्रा किन्हें दिया जाए?
📍 फ़ित्रा उन्हीं लोगों को दिया जा सकता है जो ज़कात लेने के हक़दार हैं, यानी:
ग़रीब और मोहताज
यतीम (अनाथ बच्चे)
मुसाफ़िर (जो सफ़र में मजबूर हो)
कर्ज़दार (जो अपना कर्ज़ नहीं चुका सकता)
📢 अहम एलान:
🔹 हर साल फ़ित्रा की सही रक़म लोकल इस्लामी इदारों या उलमा-ए-किराम से तस्दीक़ कर लें।
🔹 आपकी दी गई रक़म किसी मोहताज के चेहरे पर ईद की ख़ुशी ला सकती है!
रमज़ान में बरकतें और नेक अमल
रमज़ान एक सुनहरा मौका होता है, जिसमें हम अपनी ज़िन्दगी को बेहतर बना सकते हैं:
✅ रोज़े के साथ पांचों वक्त की नमाज पढ़ें
✅ कुरआन की तिलावत करें
✅ ग़रीबों की मदद करें (जकात और सदक़ा दें)
✅ घरवालों और रिश्तेदारों से अच्छा बर्ताव करें
✅ झूठ, गीबत और बुरे कामों से बचें
रमज़ान 2025 का कैलेंडर (सहरी और इफ्तार के समय)
रमज़ान | तारीख़ | दिन | सहरी | इफ़्तार |
---|---|---|---|---|
1 | 2 मार्च | रविवार | 05:12 AM | 06:15 PM |
2 | 3 मार्च | सोमवार | 05:11 AM | 06:16 PM |
3 | 4 मार्च | मंगलवार | 05:10 AM | 06:17 PM |
4 | 5 मार्च | बुधवार | 05:09 AM | 06:17 PM |
5 | 6 मार्च | गुरुवार | 05:08 AM | 06:18 PM |
6 | 7 मार्च | शुक्रवार | 05:07 AM | 06:19 PM |
7 | 8 मार्च | शनिवार | 05:06 AM | 06:19 PM |
8 | 9 मार्च | रविवार | 05:05 AM | 06:20 PM |
9 | 10 मार्च | सोमवार | 05:04 AM | 06:20 PM |
10 | 11 मार्च | मंगलवार | 05:03 AM | 06:21 PM |
11 | 12 मार्च | बुधवार | 05:02 AM | 06:21 PM |
12 | 13 मार्च | गुरुवार | 05:01 AM | 06:22 PM |
13 | 14 मार्च | शुक्रवार | 05:00 AM | 06:22 PM |
14 | 15 मार्च | शनिवार | 04:59 AM | 06:23 PM |
15 | 16 मार्च | रविवार | 04:58 AM | 06:24 PM |
16 | 17 मार्च | सोमवार | 04:57 AM | 06:25 PM |
17 | 18 मार्च | मंगलवार | 04:56 AM | 06:25 PM |
18 | 19 मार्च | बुधवार | 04:55 AM | 06:26 PM |
19 | 20 मार्च | गुरुवार | 04:54 AM | 06:26 PM |
20 | 21 मार्च | शुक्रवार | 04:52 AM | 06:27 PM |
21 | 22 मार्च | शनिवार | 04:51 AM | 06:27 PM |
22 | 23 मार्च | रविवार | 04:50 AM | 06:28 PM |
23 | 24 मार्च | सोमवार | 04:49 AM | 06:28 PM |
24 | 25 मार्च | मंगलवार | 04:47 AM | 06:29 PM |
25 | 26 मार्च | बुधवार | 04:46 AM | 06:30 PM |
26 | 27 मार्च | गुरुवार | 04:45 AM | 06:30 PM |
27 | 28 मार्च | शुक्रवार | 04:44 AM | 06:31 PM |
28 | 29 मार्च | शनिवार | 04:43 AM | 06:31 PM |
29 | 30 मार्च | रविवार | 04:42 AM | 06:32 PM |
30 | 31 मार्च | सोमवार | 04:40 AM | 06:32 PM |

