खोह नदी में अनियंत्रित खनन से मच रहा हाहाकार, त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान को मिला सत्यापन — प्रशासन पर गंभीर सवाल…. 

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कोटद्वार – कोटद्वार की प्रसिद्ध खोह नदी इन दिनों भारी संकट के दौर से गुजर रही है। नदी में चैनेलाइजेशन के नाम पर हो रहा अनियंत्रित खनन अब एक विकराल रूप ले चुका है। नदियों की कोख को दिन-रात चीरते हुए, खनन माफिया बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों से उपखनिज निकाल रहे हैं। स्थिति यह है कि न तो दिन का उजाला और न ही रात का अंधेरा, इन खननकारियों की गतिविधियों को रोक पा रहा है।

खनन माफिया इतने सक्रिय और संगठित हैं कि रात के बाद का समय उनके लिए ‘सुनहरा वक्त’ बन गया है, जब प्रशासन की निगरानी सबसे कमजोर होती है। उसी समय में भारी मात्रा में खनिज की चोरी होती है। खनन स्थलों पर दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतारें लगी रहती हैं, और स्थानीय लोग भयभीत होकर इस मंजर को देखते रह जाते हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री के बयान से उठे सवाल

इस पूरे मामले पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का हालिया बयान अब पूरी तरह से सटीक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा था कि, “प्रदेश में खनन माफिया बेलगाम हो चुके हैं और प्रशासनिक तंत्र की नाकामी इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है।” खोह नदी की हालत उन्हीं शब्दों की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी है।

सुरक्षा दीवार पर भी खतरा

चिंता की बात यह है कि खननकर्ताओं ने नदी के किनारे बनी सुरक्षा दीवार की नींव तक खोद दी है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई यह दीवार नदी के किनारे बसे लोगों की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी। अब इस दीवार की नींव कमजोर हो चुकी है, जिससे आगामी बरसात के मौसम में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यदि समय रहते कार्यवाही नहीं की गई, तो जान-माल की भारी क्षति से इनकार नहीं किया जा सकता।

पार्षदों के गंभीर आरोप

स्थानीय पार्षदों ने इस पर प्रशासन और खनन कारोबारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब भी वे इस संबंध में शिकायत करते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी मौन साध लेते हैं। यह चुप्पी दर्शाती है कि कहीं न कहीं अंदरूनी सांठगांठ इस खनन के पीछे काम कर रही है।

जनता में रोष और प्रशासन से कार्रवाई की मांग

नदी किनारे रहने वाले स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है, और यदि यही रवैया जारी रहा, तो जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। पार्षदों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर सरकार से तत्काल उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्यवाही की मांग की है।

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