उत्तराखण्ड उधमसिंह नगर ज़रा हटके

कंपनी प्रबंधक ने माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश का बनाया मजाक…

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उधम सिंह नगर-जिला प्रशासन उधम सिंह नगर व इन्टरार्क कंपनी प्रबंधक ने माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश का बनाया मजाक हाई कोर्ट के रोक के बाद भी बार-बार की जा रही है मशीनों को फैक्ट्री से बाहर निकालने की कोशिश। कंपनी प्रबंधक व जिला प्रशासन नहीं चाहते हैं सिडकुल में शांति बार-बार लगातार मजदूरों को भड़काने को की जा रही है साजिश मजदूरों को भड़का कर गलत दिशा में मोड़ना चाहते हैं मजदूरों का आंदोलन ताकि आसानी से किया जा सके दमन।

 

आप सभी को ज्ञात है कि 16 अगस्त 2021 से इन्टरार्क मजदूर संगठन सिडकुल पंतनगर एवं किच्छा में मजदूर कंपनी द्वारा किए जा रहे शोषण एवं उत्पीड़न के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इन मजदूरों का पिछले 4 साल से उनके वेतन में एक भी रुपए की बढ़ोतरी नहीं दी गई है, साथ ही सालाना रूप में मिलने वाले बोनस व एलटीसी की भी कटौती कर दी गई है, अन्य सुविधाएं भी बंद कर दिए गए अपने हक एवं अधिकारों के लिए सामूहिक रूप से संगठन के माध्यम से मजदूर एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं

 

जिसमें तमाम सहयोगी संगठनों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हुए मजदूरों का सहयोग हर कदम पर किया है, विगत 16 मार्च से अभी तक मजदूरों को कोई भी सैलरी नहीं दी गई है ऐसी दशा में यह मजदूर अपने परिवार का पालन पोषण को भी ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। इनकी मदद करने के बजाय जिला प्रशासन उधम सिंह नगर बार-बार मजदूरों के मनोबल को तोड़ने का प्रयास कंपनी प्रबंधक के इशारे पर करता रहा है जो कि बहुत ही निंदनीय है। उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश में स्पष्ट रूप से यह लिखा गया है

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कि कंपनी प्रबंधक फैक्ट्री परिसर से कोई भी मशीन या उसके कलपुर्जे फैक्ट्री परिसर से बाहर नहीं ले जा सकते हैं ,परंतु इन आदेश को मजाक बनाकर रखने वाले इन्टरार्क प्रबंधक व उधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने आज फिर पंतनगर प्लांट से हाइड्रा मशीन को फैक्ट्री परिसर से बाहर शिफ्ट कराने की कोशिश की जब की हाई कोर्ट के ऑर्डर संबंधित अधिकारियों को भलीभांति उपलब्ध करा दिए जाते हैं पुलिस प्रशासन को सारी जानकारी होते हुए भी सिडकुल चौकी इंचार्ज मौके पर पहुंचकर मशीन को बाहर शिफ्ट कराने के फिराक में लगे रहे पुलिसिया जोर पर अदालत की अवमानना करते हुए मजदूरों को दबाने की कोशिश बार-बार की जाती रही है

 

आखिर यह कैसा लोकतंत्र है यह कैसी कानून व्यवस्था जोकि कमजोरो के ऊपर ही लागू होता है और पूरा तंत्र उसे कुचलने और दबाने में लगा रहता है। कभी किच्छा फैक्ट्री में कभी पंतनगर फैक्ट्री में यह तमाशा कंपनी प्रबंधक द्वारा लगातार रचा जाता रहा है लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि आज तक इतने गैरकानूनी कृत्य करने के बाद भी कंपनी प्रबंधक पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जाती है उल्टा मजदूरों को हर जगह दबाने और डराने धमकाने की कोशिश की जाती है

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कहीं झूठे मुकदमे लगाए जाते हैं तो कहीं मजबूर किया जाता है कि यह मजदूर आक्रोश में आकर कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करें। बार-बार कंपनी प्रबंधक व प्रशासन द्वारा मजदूरों को उकसाने की यह कोशिश यही दर्शाती है कि जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधक सिडकुल क्षेत्र में शांति नहीं चाहते हैं बल्कि मजदूरों को भड़का कर न्याय पूर्ण मजदूर आंदोलन को गलत दिशा की ओर भटकाने की साजिश कर रहे हैं। शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे मजदूर आंदोलन में कभी कलेक्ट्रेट के लिए उनके दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं तो कभी पुलिस द्वारा झूठे मुकदमे लगा दिए जाते हैं कभी फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मजदूरों पर मुकदमे लगा दिए जाते हैं । जिला प्रशासन एवं फैक्ट्री प्रबंधक की मिलीभगत से अब तक 70 -80 मजदूरों को पंतनगर एवं किच्छा के फैक्ट्रियों से निलंबित किया जा चुका है

 

यूनियन तोड़ने की साजिश लगातार रची जा रही है अगर यूनियन से इतनी नफरत है तो यह श्रम भवन में ताला लगवा दीजिए और कानून से यूनियन शब्द को हटा दीजिए क्योंकि जब उसका कोई वजूद ही नहीं है आप मानने को तैयार ही नहीं हो तो लोगों को गुमराह करने से क्या फायदा। मजदूरों द्वारा सिडकुल चौकी इंचार्ज को स्पष्ट रूप से कहा गया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की कॉपी अगर आती है जिनमें मशीनों को बाहर ले जाने का परमिशन होगा तो सारे मजदूर खुशी खुशी उसका पालन करते हुए मशीनों को बाहर कराने में प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे लेकिन जब तक आर्डर नहीं है तब तक किसी भी हाल में मशीनों को बाहर नहीं जाने देंगे।

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और अंत में मजदूरों द्वारा कंपनी प्रबंधक को चेताया गया कि मजदूरों के धैर्य की परीक्षा ना ली जाए क्योंकि धैर्य टूटा तो पुनः स्थापित होने में बहुत ही कठिनाई होगी। जिसका नुकसान दोनों पक्ष को उठाना पड़ेगा हम शांति के साथ समस्याओं का निस्तारण करने के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन को संयम के साथ आगे बढ़ा रहे हैं उस को गुमराह करने की कोशिश ना करें कंपनी प्रबंधक। अंत में गैरकानूनी रूप से मशीनों को फैक्ट्री से बाहर ले जाने से रोकने में मजदूरों के सामूहिक एकता ने सफलता पाई एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।

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