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सन्यास आश्रम का 69 वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास से संपन्न…….

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नारी सशक्त होगी तो समाज सशक्त होगा-स्वामी आर्यवेश

जहां नारियों का सम्मान होता है वहां देवताओं का वास होता है-माया प्रकाश त्यागी

हम अपने बच्चों के दोस्त बनकर अच्छी शिक्षा देकर सुसंस्कारित कर सकते हैं – महापौर सुनीता दयाल

गाजियाबाद- शम्भू दयाल दयानन्द वैदिक सन्यास आश्रम का 69 वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ आश्रम के प्रांगण दयानन्द नगर में संपन्न हुआ।सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान एवं आश्रम के प्रधान स्वामी आर्यवेश के ब्रह्मत्व में महायज्ञ हुआ।आज के यज्ञमान बाल्मिकी परिवार रहे।यज्ञोप्रांत यज्ञमानों को आशीर्वाद दिया गया एवं उनके सुखद जीवन की प्रभु से प्रार्थना की गई।

स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ वेद व्यास मंत्री आर्य समाज गांधी नगर ने किया।उन्होंने बताया कि आश्रम की स्थापना 1955 में स्वामी विज्ञानानंद,स्वामी सेवकानंद, वनप्रस्थि सत्यार्थी द्वारा की गई थी,उस समय मुख्य रूप से सर्वश्री तीर्थ राम,नंद लाल वोहरा, सुभाष शर्मा,ओम प्रकाश आर्य सेवक,गणपति शर्मा,वेदभानु आर्य,सागर मल एवं उदयवीर शास्त्री आदि मौजूद रहे थे।उन्होंने आर्य समाज की उपलब्धियों पर भी विस्तृत चर्चा की।वैदिक विद्वान पण्डित माया प्रकाश त्यागी ने महिला सशक्ति करण पर विचार रखते हुए कहा जहां नारियों का सम्मान होता है

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वहां देवताओं का वास होता है, मातृशक्ति ही सही मायने में ब्रह्मा है,उन्होंने अच्छी संतान के तीन आधार बताए मातृमान् पितृमानाचार्यवान् पुरुषो वेद। यह शतपथ ब्राह्मण का वचन है।वस्तुतः जब तीन उत्तम शिक्षक अर्थात् एक माता,दूसरा पिता और तीसरा आचार्य होवे तभी मनुष्य ज्ञानवान् व चरित्रवान होता है।वह कुल धन्य! वह सन्तान बड़ा भाग्यवान्! जिसके माता और पिता धार्मिक विद्वान् हों। जितना माता से सन्तानों को उपदेश और उपकार पहुंचता है उतना किसी से नहीं।जैसे माता सन्तानों पर प्रेम,उन का हित करना चाहती है उतना अन्य कोई नहीं करता।इसीलिए (मातृमान्) अर्थात् ‘प्रशस्ता धार्मिकी विदुषी माता विद्यते यस्य स मातृमान्’ धन्य वह माता है

 

कि जो गर्भाधान से लेकर जब तक पूरी विद्या न हो तब तक सुशीलता का उपदेश करती है।महायज्ञ के ब्रह्मा स्वामी आर्यवेश ने बताया कि आज स्थापना दिवस के साथ स्वामी चंद्रवेश स्मृति दिवस भी है जोकि वर्षों तक आश्रम के अध्यक्ष रहे घर घर जाकर यज्ञ और वेद प्रचार करते थे,को श्रद्धांजलि अर्पित की।उन्होंने आगे कहा की पीएम मोदी ने महर्षि दयानंद सरस्वती की द्विजन्म शताब्दी पर ज्ञान ज्योति पर्व कार्यक्रम उद्घाटन किया है, जिसे हमें जन जन तक पहुंचाना है।उन्होंने सभी को कहा कि हमें सत्यार्थ प्रकाश,ऋगवेदादि भाष्य भूमिका एवं संस्कार विधि को पढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।माता निर्माता भवति,वेद ईश्वर का ज्ञान है,

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स्त्री पुरुष दोनों का समान दायित्व है कि उसका अध्यन करें, आचरण में लाएं तभी समाज को आगे बढ़ा सकेंगे और ऊंचाई के शिखर को छू सकेंगे,नारी सशक्त होगी तो समाज सशक्त होगा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी परम उपयोगी विचार रखे। समारोह के सूत्रधार एवं मंच संचालक सत्यकेतु ने कहा कि स्वामी दयानंद क्रांतिकारी, सामाजिक वैज्ञानिक थे,उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को सम्मान के साथ पढ़ाएं एवं सम्मानित स्थान दें तभी हम प्राचीन गौरव को स्थापित कर सकेंगे।समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती सुनीता दयाल (महापौर नगर निगम) ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने समाज सुधार के बहुत कार्य किए हैं।

 

सतीप्रथा,विधवा विवाह आदि।विचारों को सुनकर तुरन्त कोई नहीं मान लेता परन्तु जब बीजारोपण हो जाता है तो धीरे धीरे स्वीकार्यता होने लगती है तो लोग मानने लगते हैं।उन्होंने महिला सशक्तिकरण के विषय पर बताया कि हर मां अपने बच्चे को प्रथम गुरु होने के नाते अच्छी शिक्षा,अच्छे संस्कार देना चाहती है ताकि वह समाज में ऊंचाइयों को छू सके,पद प्रतिष्ठा को पा सके।दुनियां में जितने भी महान पुरुष हुए हैं उन्होंने किसी न किसी मां की कोख से जन्म लेकर हुए हैं।महिला जो बच्चे को जन्म देती है खुद भी दूसरा जन्म लेती है।

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प्रसव के समय मां कितना दर्द सहती है यह शक्ति भगवान ने महिला को ही दी है।हम अपने बच्चों के दोस्त बनकर उनकी कमियों को दूर कर अच्छी शिक्षा देकर सुसंस्कारित कर सकते हैं।आज मोदी जी ने लोक सभा और राज्य सभाओं में महिलाओं को नारी शक्ति वंदन अधिनियम में 33% आरक्षण दिया है।यह बड़ी बात है।उन्होंने सुन्दर आयोजन के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

 

इस अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री बालेश्वर त्यागी, पार्षद नीरज गोयल,चौ सत्यवीर, चौ मंगल सिंह,नरेन्द्र पंचाल,डा प्रतिभा सिंघल,दयानंद शर्मा, सुभाष शर्मा,आशा आर्या, सत्य पाल आर्य, जितेन्द्र आर्य एवं प्रवीण आर्य आदि मौजूद रहे।समारोह अध्यक्ष स्वामी सुर्यवेश ने सभी दूर दराज से पधारे आर्य प्रतिनिधियों,जनप्रतिनिधियों एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। शांतिपाठ एवं ऋषि लंगर के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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